SIT ने सौंपी 5000 पेज की रिपोर्ट, ओरेवा को जिम्मेदार ठहराने पर हाईकोर्ट ने सरकार से ब्लैक लिस्ट करने का कहा
गुजरात में पिछले साल हुए मोरबी ब्रिज हादसे की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी दी है। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में ओरेवा कंपनी को सीधे तौर हादसे के जिम्मेदार ठहराया है। एसआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात सरकार से ओरेवा ग्रुप को ब्लैक लिस्ट (काली सूची) में डालने को कहा है। मोरबी ब्रिज हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद गुजरात हाई कोर्ट ने इस हादसे पर स्वत: संज्ञान लिया था। एसआईटी ने जो रिपोर्ट सौंपी है। वह कुल 5,000 पेज की है। हाई कोर्ट में दिवाली वेकेशन के बाद रिपोर्ट के आउटकम पर सुनवाई होगी
मोरबी हादसे के पीड़ितों के वकील उत्कर्ष दवे ने बताया कि एसआईटी की पूरी रिपोर्ट 5,000 पेज की है, लेकिन मोटे तौर पर एसआईटी ने इस पूरे हादसे के लिए ओरेवा ग्रुप को जिम्मेदार ठहराया है। दवे ने कहा कि इस पूरे हादसे की जांच करने वाली एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस हादसे की जिम्मेदारी कंपनी की है। हादसे वाले दिन ब्रिज पर टिकटों की संख्या को तय करने की कोई व्यवस्था और लिमिट नहीं थी। इतना ही नहीं क्राउड कंट्रोल की व्यवस्था नहीं थी। रिपोर्ट में एसआईटी ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि ब्रिज के रेनोवेशन का नाम थर्ड पार्टी से करवाया और फिर फिटनेस सर्टिफिकेट के बगैर शुरू कर दिया गया। दवे ने कहा कि पूरी रिपोर्ट काफी बड़ी है, लेकिन इसके निष्कर्ष में यही बातें अहम हैं।
कंपनी के कौन लोग जिम्मेदार?
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुजरात हाईकोर्ट को सौंपी को 5,000 पन्नों में ओरेवा कंपनी को दोषी ठहराते हुए अपनी रिपोर्ट में बाकायदा नामों का जिक्र किया है। एसआईटी ने रिपोर्ट में ओरेवा के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल, प्रबंधक दिनेश दवे और प्रबंधक दीपक पारेख घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया है। रिपोर्ट में लापरवाही का उल्लेख किया गया है और कहा गया कि रेनोवेशन के बाद पुल पर कितने लोग जाएंगे? इस बारे में कोई लिमिट तय नहीं की गई थी। इसके अतिरिक्त इसमें पुल के उद्घाटन से पहले की गई फिटनेस रिपोर्ट की अनुपस्थिति और स्थानीय नगरपालिका अधिकारियों से इनपुट मांगने में ओरेवा कंपनी की विफलता को भी नोट किया गया है। इसके अलावा, टिकटों की बिक्री बिना किसी सीमा के संचालित हुई। पुल पर सुरक्षा उपकरणों और कर्मियों की अपर्याप्त व्यवस्था भी उतनी ही चिंताजनक पाई गई।



