रांची। रेलवे में फर्जी तरीके से हुई नियुक्तियों को लेकर झारखंड में जांच अभियान शुरू किया गया है। रेलवे अधिकारियों की टीम विभिन्न कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। इस अभियान का उद्देश्य अवैध नियुक्तियों की पहचान करना है। झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में कार्यरत कर्मचारियों की भी जांच की जा रही है। रेलवे प्रशासन सभी रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है। अधिकारियों को कई मामलों में संदेहास्पद दस्तावेज मिलने की जानकारी मिली है। जांच को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। रेलवे पुलिस भी इस अभियान में सहयोग कर रही है। कई पुराने मामलों को भी जांच के दायरे में लाया गया है। मामले को लेकर विभाग सतर्क नजर आ रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय गिरोहों की पहचान की जा रही है। जांच के लिए तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। यदि ऐसा पाया जाता है तो जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। कई कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा सकती है। रेलवे पुलिस सभी तथ्यों को सावधानीपूर्वक एकत्र कर रही है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से काम कर रही है।
इस मामले का संबंध पहले सामने आए फर्जी बहाली प्रकरण से भी जोड़ा जा रहा है। कुछ वर्ष पहले वीरमास रेलवे स्टेशन से तीन फर्जी टिकट क्लर्क पकड़े गए थे। जांच में उनकी नियुक्ति अवैध पाई गई थी। आरोपियों के पास से कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे। इनमें पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र भी शामिल थे। इस खुलासे ने रेलवे भर्ती प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए थे। इसके बाद विभाग ने निगरानी और जांच को मजबूत किया। अब नई जांच में उसी नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है। रेलवे प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई में जुटा हुआ है।



