असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के अधिकांश जिले इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं। भारी बारिश और बाढ़ के कारण लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। पिछले 24 घंटों में 10 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या 41 हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों में पहुंचकर लोगों का हाल जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से हुई तबाही का दायरा बेहद व्यापक है। उनके अनुसार 25 जिलों के 1,800 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं। राज्य में 9 लाख से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने और सामान्य से 436 प्रतिशत अधिक वर्षा के कारण हालात और बिगड़ गए। भारतीय वायु सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य कर रही हैं। नाव और हेलीकॉप्टर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राज्य में 148 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में लगभग 30 हजार लोग रह रहे हैं। प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। एएसडीएमए ने कई जिलों में मौतों की पुष्टि की है। प्रशासन सभी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत कार्य चला रहा है। स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने लोगों से सहयोग की अपील की है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने असम के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले चार दिनों तक येलो अलर्ट भी प्रभावी रहेगा। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। एएसडीएमए के अनुसार कई जिलों में 6.53 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। मुख्य सचिव रवि कोटा ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में सबसे अधिक प्रभावित जिलों पर विशेष चर्चा हुई। प्रशासन हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।



