झारखंड सरकार ने माओवादी विरोधी अभियानों में बहादुरी दिखाने वाले 14 पुलिस अधिकारियों और जवानों के नाम सम्मान के लिए भेजे हैं। इन नामों की अनुशंसा राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस वीरता पदक के लिए की गई है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है। अब केंद्र सरकार इन नामों की समीक्षा करेगी। अंतिम निर्णय समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। सूची में एक आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ और कनिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। चयन चार महत्वपूर्ण अभियानों के आधार पर किया गया है। इन अभियानों में पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। सरकार ने इन अभियानों को वीरता और उत्कृष्ट पुलिसिंग का उदाहरण बताया है।
बोकारो के बंसी गांव में जनवरी 2025 में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो हार्डकोर माओवादियों को मार गिराया था। इस अभियान में शामिल छह पुलिसकर्मियों के नाम वीरता पदक के लिए भेजे गए हैं। चतरा के लावालौंग में वर्ष 2019 में टीएसपीसी उग्रवादियों के हमले का पुलिस ने मजबूती से मुकाबला किया था। इस कार्रवाई में शामिल तीन पुलिसकर्मियों के नाम भी अनुशंसित किए गए हैं। वर्ष 2023 में बूटकुईंया क्षेत्र में संयुक्त अभियान के दौरान एक इनामी माओवादी ढेर किया गया था। इस अभियान में शामिल दो पुलिसकर्मियों के नाम भी सूची में हैं। इन अभियानों में पुलिस ने साहस और रणनीति का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। राज्य सरकार ने सभी के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की पहल की है। इससे पुलिस बल के मनोबल को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
गुमला के कुरुमगढ़ क्षेत्र में वर्ष 2021 में चलाए गए अभियान में तीन पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बेहतर अनुसंधान और प्रभावी रणनीति के आधार पर उनके नाम भी अनुशंसित किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी मामलों की जांच करेगा। इसके बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। स्वीकृति मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उनकी बहादुरी और समर्पण का प्रतीक होगा। झारखंड पुलिस के लिए यह गर्व का अवसर माना जा रहा है। नक्सल विरोधी अभियानों में इन अधिकारियों और जवानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राज्य सरकार ने उम्मीद जताई है कि सभी योग्य पुलिसकर्मियों को सम्मान मिलेगा। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी है।



