रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस पदोन्नति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर हरिश कुमार पाठक की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने राज्य सरकार को पदोन्नति देने का निर्देश दिया। आदेश में वर्ष 2018 की डीपीसी की तिथि से इंस्पेक्टर पद देने को कहा गया है। साथ ही सभी सेवा संबंधी लाभ देने का निर्देश भी दिया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और शिवानी भारद्वाज ने पक्ष रखा। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया। इसके बाद विस्तृत आदेश पारित किया गया। यह फैसला सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पदोन्नति रोकने की कार्रवाई कानूनी रूप से उचित नहीं थी। अदालत ने जूनियर अधिकारियों के समान सभी लाभ देने का आदेश दिया। इनमें वेतन, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ शामिल हैं। सरकार को आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी बाद में दोषमुक्त हो जाता है तो उसे मूल डीपीसी की तिथि से पदोन्नति मिलनी चाहिए। यह कानून का स्थापित सिद्धांत है। न्यायालय ने वर्ष 2022 के आपराधिक मामले को भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि इसका वर्ष 2018 की डीपीसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि उस समय ऐसा कोई मामला लंबित नहीं था।
हरिश कुमार पाठक वर्ष 1991 से पुलिस सेवा में कार्यरत हैं। वर्ष 2018 की पदोन्नति प्रक्रिया में उनका नाम शामिल था। विभागीय कार्यवाही के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई। वर्ष 2020 की डीपीसी में भी उन्हें उपयुक्त माना गया। इसके बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सभी विभागीय मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है। अधिकांश मामलों में उन्हें दोषमुक्त किया गया। अंतिम राहत वर्ष 2021 में मिली थी। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की। अब हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।



