झारखंड में हाल में बाजार में आए ROYAL CRAZY देसी शराब ब्रांड को लेकर विवाद सामने आया है। विवाद मुख्य रूप से बोतल पर लगे लेबल की जानकारी से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इस ब्रांड का निर्माण बोकारो स्थित श्री ओम ट्रेडर्स ने किया है। आरोप है कि खुदरा दुकानदारों को इसे बेचने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दुकानदारों ने इसे लेकर असमंजस की स्थिति होने की बात कही है। इसी बीच ब्रांड के लेबल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। राज्य में शराब की बोतलों पर निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का विवरण दिए जाने की व्यवस्था होने की बात कही गई है। आरोप है कि ROYAL CRAZY के लेबल में इस तरह की जानकारी पूरी तरह दर्ज नहीं है। इस वजह से विभाग द्वारा लेबल को मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले में विभागीय स्तर पर नियमों की स्थिति स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा। लेबल पर उत्पाद को Matured Malt से बना मिक्चर बताया गया है। यह शब्द सामान्य तौर पर स्कॉच से जुड़े उत्पादों के संदर्भ में इस्तेमाल होता है।
देसी शराब के निर्माण में Grain ENA, DM Water और Flavour जैसी सामग्री के इस्तेमाल का उल्लेख अन्य ब्रांडों के लेबल पर किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि ROYAL CRAZY के लेबल पर इन सामग्रियों का नाम नहीं दिया गया है। यही बिंदु इस विवाद का मुख्य आधार बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में बिकने वाले दूसरे देसी शराब ब्रांडों पर निर्माण सामग्री का विवरण दर्ज रहता है। ऐसे में नए ब्रांड के लेबल को लेकर अलग प्रक्रिया अपनाए जाने का सवाल उठ रहा है। विभाग ने किस आधार पर इस लेबल को स्वीकृति दी, इसे लेकर स्पष्टता मांगी जा रही है। मामले से जुड़े आरोपों में कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण की बात भी कही गई है। हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसी तरह अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस कारण इन दावों को जांच के विषय के रूप में देखा जाना जरूरी है।
शराब कारोबार से जुड़े नियमों का उद्देश्य उत्पाद और उसकी संरचना से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना भी है। लेबल पर दर्ज विवरण उपभोक्ताओं और नियामक व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ROYAL CRAZY के मामले में इसी व्यवस्था के पालन को लेकर प्रश्न उठाया गया है। यदि निर्धारित नियमों के तहत निर्माण सामग्री लिखना जरूरी है तो संबंधित लेबल की समीक्षा की जरूरत हो सकती है। खुदरा दुकानदारों पर कथित दबाव का मुद्दा भी जांच का हिस्सा बन सकता है। बाजार में किसी ब्रांड की बिक्री को लेकर विभागीय निर्देशों की प्रकृति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इस मामले में श्री ओम ट्रेडर्स की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना भी महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभाग से भी लेबल की मंजूरी की प्रक्रिया पर जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल उपलब्ध आरोपों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।



