कोलकाता के चोरबागान में दुर्गा पूजा पंडाल के दौरान भगदड़ की घटना के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। सभी जिलों के एसपी और एसएसपी को पूजा पंडालों का दोबारा सुरक्षा ऑडिट कराने को कहा गया है। अधिकारियों को जांच में मिलने वाली खामियों को तत्काल दूर कराना होगा। यह निर्देश लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी सभी पूजा पंडालों पर लागू होगा। अधिक भीड़ जुटने वाले और संवेदनशील स्थानों पर खास निगरानी रखी जाएगी। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि पूजा समितियों ने सुरक्षा से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन किया है। प्रवेश और निकास के रास्तों की स्थिति जांच का प्रमुख हिस्सा होगी। आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मार्ग उपलब्ध होने चाहिए। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी की व्यवस्था भी देखी जाएगी। बैरिकेडिंग की मजबूती और उसकी उचित व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा।
भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में पार्किंग और यातायात प्रबंधन की भी समीक्षा होगी। पुलिस को जरूरत के मुताबिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। संवेदनशील स्थानों पर स्थिति के अनुसार ड्रोन की मदद भी ली जा सकती है। भीड़ के आकलन के आधार पर पुलिसकर्मियों की तैनाती तय की जाएगी। पंडालों में पर्याप्त रोशनी और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का होना जरूरी होगा। अग्निशमन उपकरणों और बिजली से जुड़े सुरक्षा इंतजामों की भी जांच की जाएगी। आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जाएगा। किसी घटना की स्थिति में पुलिस और प्रशासन की टीम तुरंत कार्रवाई कर सके, इसके लिए तैयारियां दुरुस्त रखने को कहा गया है।
दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए राज्य में 14 से 23 अक्टूबर तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश पहले ही जारी हो चुका है। इस तैनाती में झारखंड सशस्त्र पुलिस और इंडियन रिजर्व बटालियन के जवान शामिल होंगे। स्पेशलाइज्ड इंडियन रिजर्व बटालियन और झारखंड जगुआर के जवानों को भी ड्यूटी पर लगाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में रैपिड एक्शन पुलिस की अतिरिक्त तैनाती जरूरत के अनुसार की जा सकती है। बम निरोधक और अश्रु गैस दस्तों को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने जिलों को सुरक्षा इंतजामों में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ने की हिदायत दी है। प्रशासन का लक्ष्य भीड़ को नियंत्रित रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। कोलकाता की घटना के बाद राज्य में पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।



