बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों के आंदोलन से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिला प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भविष्य में प्लांट की शांति भंग होने की आशंका दिखे तो तुरंत कदम उठाए जाएं। प्रशासन को स्थिति बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते कार्रवाई करना संयंत्र को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी है। इस मामले में नियोजन की मांग को लेकर हुए आंदोलन के कारण बीएसएल का उत्पादन प्रभावित हुआ था। प्लांट के प्रवेश द्वार बंद होने से कर्मचारियों की आवाजाही भी बाधित हुई थी। करीब 15 हजार अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी के दौरान संयंत्र के अंदर फंस गए थे। कई कर्मचारी काम पर पहुंचने के बावजूद प्लांट में प्रवेश नहीं कर पाए थे।
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने की। बोकारो उपायुक्त की ओर से अदालत को अंडरटेकिंग देकर बताया गया कि प्लांट के सभी 11 गेट खोल दिए गए हैं। इसके बाद कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य हो गई है। प्रशासन ने यह भी कहा कि प्लांट में शांति व्यवस्था बहाल हो चुकी है। याचिकाकर्ता की ओर से भी अदालत को बताया गया कि अब स्थिति सामान्य है। इन जानकारियों के आधार पर अदालत ने रिट याचिका का निष्पादन कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने प्रशासन को आगे भी हालात पर नजर रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में तनाव बढ़ने की आशंका हो तो प्रशासन को पहले ही कार्रवाई करनी होगी। ऐसा करने से संयंत्र के कामकाज और संपत्ति को नुकसान पहुंचने से रोका जा सकेगा। इससे पहले 18 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य बनाए रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने बोकारो प्रशासन को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने और जवाब दाखिल करने को भी कहा था। पिछली सुनवाई में बताया गया था कि विस्थापितों ने करीब नौ दिनों तक प्लांट के सभी प्रवेश द्वार जाम कर दिए थे। इससे प्लांट के भीतर और बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया था।
आंदोलन के कारण बीएसएल की कई प्रमुख उत्पादन इकाइयों का कामकाज ठप हो गया था। प्रभावित इकाइयों में ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शॉप शामिल थीं। उत्पादन प्रभावित होने से संयंत्र प्रबंधन के सामने कठिनाइयां बढ़ गई थीं। अब सभी 11 गेट खुलने और कर्मचारियों की आवाजाही बहाल होने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। इसके बाद याचिका का निपटारा किया गया। फिर भी जिला प्रशासन को भविष्य में संभावित तनाव को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। कोर्ट का निर्देश है कि शांति व्यवस्था बिगड़ने से पहले जरूरी कदम उठाए जाएं।



