झारखंड हाईकोर्ट में धनबाद के फहीम खान की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। फहीम खान धनबाद के वासेपुर इलाके के निवासी हैं। उन्होंने अपनी समयपूर्व रिहाई के मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आदेश का पालन करने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा। सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया गया है। इसी आधार पर कोर्ट से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया गया। हाईकोर्ट ने सरकार की मांग स्वीकार करते हुए आठ सप्ताह का समय प्रदान किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2028 को निर्धारित की। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित प्रतिवादियों को उपस्थित होना पड़ेगा। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने अपना पक्ष रखा।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान भी राज्य सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा था। सरकार की इस मांग पर हाईकोर्ट ने एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने जुर्माने की रकम झालसा में जमा कराने का निर्देश दिया था। झालसा का पूरा नाम झारखंड स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी है। यह मामला फहीम खान की रिहाई से जुड़े पुराने न्यायिक आदेश के अनुपालन का है। हाईकोर्ट ने पहले उनकी क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की थी। उस दौरान कोर्ट ने सरकार को 1984 की नीति के तहत उनके मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए सरकार को छह सप्ताह का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर फहीम खान ने अवमानना याचिका दाखिल की। अब इस याचिका पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
फहीम खान को वर्ष 2009 में हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 लागू की गई थी। हाईकोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह 18 साल से अधिक समय जेल में वास्तविक रूप से बिता चुके हैं। रिमिशन सहित उनकी कुल सजा की अवधि 20 साल से अधिक बताई गई है। इसके बाद उन्होंने समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था। हालांकि, राज्य सरकार ने उनका आवेदन 2007 की नीति के आधार पर अस्वीकार कर दिया था। इसके विपरीत हाईकोर्ट ने 1984 की नीति के आधार पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के पालन की मांग को लेकर मामला अदालत पहुंचा है। अब राज्य सरकार को निर्धारित समय में न्यायालय के निर्देश पर कार्रवाई करनी होगी। अगली सुनवाई में सरकार के अनुपालन की स्थिति पर नजर रहेगी।



