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अदालत ने आठ साल की देरी को बताया गंभीर प्रशासनिक चूक.

2017 निर्णय लागू नहीं होने पर सरकार से जवाब तलब.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। अदालत ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि आदेशों का पालन जरूरी है। लंबे समय तक देरी स्वीकार्य नहीं है। इससे व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

सरकार की ओर से अधिकार संबंधी जानकारी दी गई। बताया गया कि उपायुक्त के अधिकार सीमित हैं। राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई संभव थी। अदालत ने पूछा कि कदम क्यों नहीं उठाया गया। स्पष्ट जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ।

कोर्ट ने समाधान प्रस्तुत करने को कहा है। विभागीय स्तर पर परामर्श की प्रक्रिया शुरू होगी। अगली सुनवाई में हलफनामा दाखिल किया जाएगा। न्यायालय ने अगली तारीख तय की। मामले पर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी।

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