रांची से एक महत्वपूर्ण कानूनी खबर सामने आई है। खूंटी के कोचांग गैंगरेप मामले में दोषी अजूब सांडी पूर्ति को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपी ने सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील दाखिल की थी। अदालत ने पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा की। सुनवाई न्यायमूर्ति रंजन मुखोपाध्याय की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने रिकॉर्ड और गवाही का अध्ययन किया। पीड़िता द्वारा की गई पहचान को अहम माना गया। टीआईपी प्रक्रिया को भी विश्वसनीय पाया गया। इसके आधार पर जमानत अस्वीकार की गई।
सरकार की ओर से अधिवक्ता भोला नाथ ओझा ने मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि आरोपी अपराध में सक्रिय रूप से शामिल था। अदालत ने अभियोजन की बातों को स्वीकार किया। न्यायालय ने कहा कि अपराध समाज को प्रभावित करने वाला है। इसलिए आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि दोष सिद्ध होने के बाद जमानत आसान नहीं होती। सभी तथ्यों को देखते हुए याचिका खारिज कर दी गई। अदालत का आदेश सुनते ही कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। पीड़ित पक्ष ने फैसले का स्वागत किया।
साल 2018 में यह घटना पूरे देश में सुर्खियों में रही थी। पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान पांच महिलाओं का अपहरण किया गया था। महिलाएं जागरूकता कार्यक्रम के लिए गांव पहुंची थीं। आरोपियों ने उनके साथ गैंगरेप किया था। निचली अदालत ने मामले को गंभीर अपराध माना था। फादर अल्फांसो को साजिशकर्ता बताया गया था। 17 मई 2019 को सभी दोषियों को उम्रकैद मिली। कई आरोपियों के नाम फैसले में शामिल थे। अजूब सांडी पूर्ति भी उन्हीं दोषियों में से एक था। हाईकोर्ट के ताजा फैसले से न्यायिक प्रक्रिया मजबूत हुई है।



