रांची से आई बड़ी कानूनी खबर में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया। अदालत ने डाक विभाग द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला लंबे समय से चल रहे सेवा विवाद से जुड़ा था। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकरण का फैसला कानून के अनुरूप है। अदालत ने राम सेवक महतो को राहत देते हुए आदेश बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान विभाग ने नियमितीकरण पर आपत्ति जताई थी। विभाग ने टेम्पररी स्टेटस को लेकर कोई विवाद नहीं बताया। न्यायालय ने कहा कि तथ्य और सेवा रिकॉर्ड स्पष्ट हैं। इसलिए हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
राम सेवक महतो रांची जीपीओ में वर्षों तक कार्यरत रहे थे। उन्होंने सेवा नियमित करने की मांग को लेकर मामला दायर किया था। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने उनके पक्ष में फैसला दिया था। आदेश के अनुसार उन्हें टेम्पररी स्टेटस दिया जाना था। तीन साल बाद उन्हें ग्रुप डी यानी एमटीएस पद का लाभ मिलना था। अधिकरण ने विभाग को नियमितीकरण पर विचार करने को कहा था। इसी आदेश के खिलाफ डाक विभाग हाईकोर्ट पहुंचा था। विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज की थी। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक काम लेना महत्वपूर्ण तथ्य है। इसलिए कर्मचारी के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी 1993 से लगातार सेवा दे रहे थे। करीब 25 वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि उन्हें स्वीकृत पद पर काम कराया गया। सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी फैसले का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि नियमों का उद्देश्य गलत नियुक्ति रोकना है। लेकिन लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को न्याय देना भी जरूरी है। फैसले को कर्मचारियों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संतुलित निर्णय बताया। निर्णय से समान मामलों पर भी असर पड़ सकता है।



