रांची की न्यायायुक्त अदालत ने आपराधिक मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने सजा के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज कर दिया। अपील निर्धारित समय सीमा से 16 दिन देर से दाखिल की गई थी। अदालत ने कहा कि समय सीमा का पालन अनिवार्य है। बिना उचित कारण देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपीलकर्ता के आचरण पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि आदेशों की अनदेखी न्याय व्यवस्था को कमजोर करती है। अपीलकर्ता को पहले ही पर्याप्त अवसर दिया गया था। फिर भी उसने अदालत के समक्ष सरेंडर नहीं किया। इसलिए अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया गया।
यह मामला रेलवे संपत्ति पर अवैध कब्जे से जुड़ा था। आरोपी सनी गिरी को निचली अदालत ने दोषी पाया था। उसे एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई थी। साथ ही 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया था। इसके खिलाफ उसने उच्च अदालत में अपील की। लेकिन अपील समय पर दाखिल नहीं की गई। अदालत ने कहा कि कानून प्रक्रिया आधारित व्यवस्था है। नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। आरोपी को छह माह से अधिक का समय दिया गया था। इसके बावजूद उसने कोई कदम नहीं उठाया। इस कारण अदालत ने राहत देने से इनकार किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट टिप्पणी की। कहा गया कि अपील करना कानूनी अधिकार है। लेकिन प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर यह अधिकार समाप्त हो जाता है। न्यायालय ने निचली अदालत को गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई जल्द करने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि आदेशों का पालन जरूरी है। न्याय व्यवस्था अनुशासन पर आधारित होती है। फैसले को न्यायिक सख्ती का उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे महत्वपूर्ण संदेश बताया। इससे भविष्य में लापरवाही करने वालों पर असर पड़ेगा।



