रांची में गोड्डा जिले से जुड़े एक पुराने मामले पर बड़ा फैसला आया है। यह मामला वर्ष 2009 की एक घटना से जुड़ा है। बैल को लेकर हुए झगड़े में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। निचली अदालत ने चार लोगों को हत्या का दोषी माना था। उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। इसके बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने इसे गैर-इरादतन हत्या माना। सजा घटाकर पांच साल कर दी गई थी। आरोपियों ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटना मामूली विवाद से शुरू हुई थी। यह सुनियोजित हत्या नहीं थी। आरोपियों ने पहले ही करीब दो साल जेल काट ली थी। अदालत ने कहा कि मामला बहुत पुराना है। आरोपी लंबे समय तक जमानत पर भी रहे। अदालत ने दोषसिद्धि बरकरार रखी। लेकिन सजा को घटाकर जेल में बिताए समय तक सीमित कर दिया। चारों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया गया। अदालत ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार की। यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
घटना 16 अप्रैल 2009 की बताई गई है। मृतक सीता मंडल अपने घर पर मुरही बना रहे थे। तभी एक बैल भूसा खाने आ गया। बैल भगाने पर विवाद बढ़ गया। झगड़े में लाठी से सिर पर वार हुआ। इसी चोट से मौत हो गई। निचली अदालत ने इसे हत्या माना था। उच्च अदालतों में लंबे समय तक सुनवाई चली। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय दिया। इस फैसले से मामला समाप्त हुआ।



