
झारखंड में एमएसएमई कोयला आपूर्ति नीति को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस संबंध में वित्त विभाग को शिकायत पत्र भेजा गया है। शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की विभागीय जांच कराने की मांग की गई है। प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने नीति के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। कुछ इकाइयों पर उत्पादन और खपत के आंकड़ों में गड़बड़ी करने का दावा किया गया है। विभागीय पोर्टल के आंकड़ों का भी हवाला दिया गया है। शिकायत में सरकार को आर्थिक नुकसान होने की बात कही गई है। मामले ने प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है।
शिकायतकर्ता विश्वनाथ झा ने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक कई इकाइयों का विस्तृत ऑडिट नहीं हुआ। आरोप है कि वर्ष 2021 के बाद प्रभावी निरीक्षण भी नहीं किया गया। शिकायत के अनुसार इससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिला। वर्ष 2025-26 में 13 इकाइयों को कोयला आवंटित किया गया था। इनमें से केवल कुछ इकाइयों ने ही बुकिंग कराई। बाकी इकाइयों के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में डेटा में हेरफेर की आशंका जताई गई है। नीतियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। संबंधित विभागों से कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
शिकायत में लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है। इसमें सीसीएल, राज्य सरकार और जीएसटी मद में नुकसान होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम कोयले की बुकिंग हुई। बिना वैध माइनिंग चालान के कोयला परिवहन का भी आरोप लगाया गया है। इसे नियमों का उल्लंघन बताया गया है। शिकायत में दोषी अधिकारियों और संबंधित इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी की अपील की गई है। मामले की जांच की मांग वित्त विभाग और खान विभाग से भी की गई है। फिलहाल संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। मामला जांच की मांग के साथ चर्चा में बना हुआ है।



