Ranchi: रांची विश्वविद्यालय में परीक्षा सुधार एवं शैक्षणिक मूल्यांकन समिति की बैठक बुधवार को आयोजित हुई। बैठक मोराबादी परिसर के एकेडमिक ब्लॉक स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना था। बैठक की अध्यक्षता कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान एस. रावत ने की। वह समिति के अध्यक्ष भी हैं। बैठक में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. गुलशन धमीजा मौजूद रहे। किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली के डॉ. अमित सुमन ने भी सुझाव दिए। आरएलएसवाई कॉलेज रांची के प्रभारी प्राचार्य डॉ. विष्णु चरण महतो बैठक में शामिल हुए। NIOS नोएडा के डॉ. टी.एन. गिरी और प्रो. उदयन घोष भी मौजूद रहे।
बैठक का संचालन रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक और समिति के संयोजक डॉ. संजय सिंह ने किया। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विशेषज्ञ सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार परीक्षा प्रणाली को छात्र-केंद्रित बनाना जरूरी है। उन्होंने पारदर्शिता और गुणवत्ता को परीक्षा व्यवस्था की प्राथमिकता बताया। कुलपति ने कहा कि समिति की अनुशंसाओं से विश्वविद्यालय को लाभ मिलेगा। बैठक में मौजूदा परीक्षा प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। सतत मूल्यांकन और आंतरिक मूल्यांकन व्यवस्था पर चर्चा हुई। सेमेस्टर अंत परीक्षा प्रणाली को भी समीक्षा के दायरे में रखा गया। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर विशेषज्ञों ने विचार रखा। निष्पक्ष और समयबद्ध परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सुझाव सामने आए।
बैठक में आउटकम आधारित शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को प्रभावी बनाने पर विचार किया गया। क्रेडिट मोबिलिटी की व्यवस्था को बेहतर करने की जरूरत बताई गई। बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों को अपनाने के विकल्पों पर चर्चा की गई। पाठ्यक्रमों में हुए बदलाव को लेकर समिति ने जानकारी ली। पूर्णांक संरचना में किए गए संशोधनों पर भी विचार किया गया। परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए। समिति ने विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप बेहतर, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।

