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हाईकोर्ट ने 1990 केस में सजा घटाई.

लक्ष्मीकांत दास को जेल अवधि तक राहत.

झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 36 साल पुराने गोलीकांड में लक्ष्मीकांत दास की दोषसिद्धि और सजा में बदलाव किया है। अदालत ने धारा 307 आईपीसी के तहत उसकी सजा को धारा 324/34 आईपीसी में बदल दिया। आर्म्स एक्ट की धारा 27 के आरोप से उसे बरी कर दिया गया। अदालत ने उसे इस आरोप में संदेह का लाभ दिया। धारा 324 के तहत उसकी सजा पांच माह 15 दिन की जेल अवधि तक सीमित कर दी गई। यह अवधि वह पहले ही न्यायिक हिरासत में काट चुका है। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2003 में उसे सात वर्ष की सजा सुनाई थी। आर्म्स एक्ट के तहत भी तीन वर्ष की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील पर सुनवाई के बाद पुराने आदेश में संशोधन किया।

मामला 13 जून 1990 को सरायकेला थाना क्षेत्र के घाघी गांव में हुई फायरिंग से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, घासीराम महतो और कंद्रू महतो बाड़ी में बाउंड्री का काम कर रहे थे। इसी दौरान लक्ष्मीकांत दास समेत तीन लोग वहां पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बाउंड्री बनाने से मना किया। इसके बाद अमूल्य दास ने तीर चलाया था। तीर निशाने पर नहीं लगा था। फिर लक्ष्मीकांत दास पर बंदूक से गोली चलाने का आरोप लगाया गया था। फायरिंग में निकले छर्रों से घासीराम, कंद्रू और रंजीत महतो घायल हुए थे। घटना के संबंध में सरायकेला थाने में कांड संख्या 41/1990 दर्ज हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने बाद में लक्ष्मीकांत दास समेत आरोपियों को दोषी ठहराया था। अमूल्य दास और ज्ञानी दास को भी धारा 307/34 के तहत सात वर्ष की सजा मिली थी। अपील लंबित रहने के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई। इसलिए उनके खिलाफ अपील समाप्त कर दी गई।

लक्ष्मीकांत दास की अपील पर हाईकोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की। अदालत ने पाया कि मामले में 11 गवाहों की गवाही हुई थी। हालांकि जांच अधिकारी को अदालत में पेश नहीं किया गया था। घायल गवाहों ने फायरिंग से चोट लगने की बात कही थी। इसके बावजूद संबंधित इंजरी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं थी। डॉक्टर भी चोट की प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। मौके से छर्रे या खाली कारतूस बरामद होने का भी रिकॉर्ड नहीं था। अमूल्य दास के घर से बंदूक और एक खाली कारतूस जब्त किया गया था। लेकिन बैलिस्टिक रिपोर्ट नहीं होने से हथियार को घटना से जोड़ना संभव नहीं हुआ। अदालत ने यह भी देखा कि बंदूक का लाइसेंस अमूल्य दास के नाम था। अमूल्य दास ने अपने धारा 313 के बयान में आत्मरक्षा में हवा में गोली चलाने की बात कही थी। दूसरी ओर, अभियोजन के गवाहों ने फायरिंग लक्ष्मीकांत द्वारा किए जाने का आरोप लगाया था।

 

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