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किशोर हिरासत मामले में हाईकोर्ट की सख्ती.

CCTV खराब मिलने पर एसएसपी को जांच का आदेश.

रांची के डोरंडा थाना से जुड़े कथित अवैध हिरासत मामले की झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। फिरोज अंसारी और अन्य की ओर से दायर हेवियस कॉरपस याचिका पर अदालत ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान डोरंडा थाना का सीसीटीवी खराब होने की जानकारी सामने आई। कोर्ट ने इस स्थिति पर रांची एसएसपी को निर्देश जारी किया। एसएसपी को रांची शहर के सभी थानों में सीसीटीवी की स्थिति जांचने को कहा गया। अदालत ने खास तौर पर डोरंडा थाना का सीसीटीवी ठीक कराने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि किशोर को 19 वर्ष का बताकर न्यायिक रिमांड में भेजा गया। परिवार का दावा है कि किशोर की उम्र 18 वर्ष से कम है। परिजनों ने उम्र के समर्थन में जन्म प्रमाणपत्र भी पुलिस को दिया था।

याचिका के अनुसार किशोर को चार सितंबर 2026 से हिरासत में रखा गया था। उस समय उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। आठ सितंबर को उसे न्यायिक रिमांड में भेजे जाने की बात याचिका में कही गई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डोरंडा थाना प्रभारी से सीसीटीवी फुटेज मांगा था। थाना प्रभारी ने बताया था कि सीसीटीवी काम नहीं कर रहा है। इस पर कोर्ट ने अब एसएसपी को व्यापक जांच का निर्देश दिया है। अदालत ने रांची शहर के अन्य थानों की सीसीटीवी व्यवस्था भी देखने को कहा है। साथ ही डोरंडा थाना का कैमरा दुरुस्त कराने पर विशेष जोर दिया गया है। कोर्ट ने मामले में उम्र निर्धारण को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने पूछा था कि 19 वर्ष की उम्र निर्धारित करने का आधार क्या था।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि किशोर की जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है। उनके अनुसार चार सितंबर 2026 को उसकी उम्र 17 वर्ष थी। इसके समर्थन में आधार कार्ड की प्रति अदालत में पेश की गई। दूसरी ओर राज्य सरकार के दस्तावेजों में आठ सितंबर को उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज थी। मेडिकल फिटनेस से जुड़े दस्तावेज में भी 19 वर्ष की उम्र दर्ज होने की बात सामने आई। कोर्ट ने इन दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए तारीखों में ओवरराइटिंग देखी। अदालत ने कहा कि कथित हेरफेर की स्थिति को रिमांड के समय संज्ञान में लिया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक आयुक्त से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में ओवरराइटिंग के बावजूद रिमांड आदेश पारित होने का कारण स्पष्ट करने को कहा गया है।

 

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