पाकिस्तान में इमरान खान की गिरफ्तारी और रिहाई को लेकर बवाल मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट से रिहाई मिलने के बाद आज हाईकोर्ट ने भी इमरान खान को चार मामलों में जमानत दे दी है। कोर्ट ने इमरान खान की किसी भी नए मामले में गिरफ्तारी पर 15 मार्च तक रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, पुराने मामलों में भी गिरफ्तारी पर 17 मई तक रोक लगाई है। इसके बाद इमरान खान ने पाकिस्तान की शहबाज सरकार पर निशाना साधा है। इमरान खान ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया तो पाकिस्तान में और गदर मचेगा। उन्होंने कोर्ट में गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में हिंसा को लेकर भी माफी मांगने से इनकार कर दिया। इमरान ने कहा कि पाकिस्तान में लग रहा है जैसे कि मार्शल लॉ लगा हुआ है। उन्होंने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर भी हमला बोला और कहा कि यह सब सिर्फ एक आदमी के इशारे पर हो रहा है।
इमरान ने कोर्ट में हिंसा की निंदा करने से किया इनकार
हाईकोर्ट में पेशी के दौरान जज ने इमरान खान से पाकिस्तान में हुई हिंसा की निंदा करने को कहा। इस पर इमरान ने सुप्रीम कोर्ट वाला डायलॉग दोहराते हुए कहा कि मैं तो गिरफ्तार था, मेरे पास फोन तक नहीं था। ऐसे में मैं हिंसा के लिए जिम्मेदार कैसे हो सकता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि गिरफ्तार किया गया तो हिंसा होगी। उन्होंने कहा कि मुझे बाहर रहने दीजिए ताकि मैं लोगों को कंट्रोल कर सकूं। कोर्ट में हिंसा की निंदा करने और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, इसके बावजूद कोर्ट ने उन्हें अल कादिर ट्रस्ट केस में 17 मई तक के लिए जमानत दे दी।
पाक सेना को दी खुलेआम धमकी
पेशी के बाद कोर्ट परिसर में ही इमरान खान ने कहा कि अगर मुझे फिर गिरफ्तार किया गया तो जितना कुछ हुआ है उससे भी ज्यादा होगा। उन्होंने परोक्ष रूप से सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि मेरी गिरफ्तारी से पाकिस्तान में नया गदर होगा। दरअसल, 9 मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पीटीआई समर्थकों ने सेना को ही निशाना बनाया था। समर्थकों ने लाहौर में कोर कमांडर के घर को लूटकर आग लगा दी। इसके अलावा रावलपिंडी में सेना के हेडक्वार्टर पर हमला किया। मियांवाली में पाक वायु सेना के एयरबेस पर तोड़फोड़ और आगजनी की।
इमरान के सामने बेबस हुई पाक सेना
पाकिस्तान की समझ रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस वक्त इमरान खान पाकिस्तान की सेना से भी मजबूत हो चुके हैं। उनके पास इतनी हिम्मत आ गई है कि वे सीधे तौर पर सेना को धमकियां दे रहे हैं। इसकी ताकत उन्हें 9 मई को समर्थकों की सेना पर हमले और उसके बाद कोई कार्रवाई न होने के बाद मिली है। सेना ने हमले की सिर्फ निंदा की है और 9 मई को एक काला अध्याय बताया है। जनरल असीम मुनीर ने भी सेना पर हमले को लेकर अभी तक चुप्पी नहीं तोड़ी है।




