हालांकि, यह कदम ऑटोमोबाइल बिक्री और सरकारी राजस्व को बढ़ावा देने की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे अधिक बोझ समाज के गरीब तबके पर पड़ेगा।
यह प्रतिबंध सीधे तौर पर उन लाखों वाहन मालिकों को प्रभावित करेगा जिनके पास पुराने वाहन हैं और जिनके पास नए वाहन खरीदने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। इससे उन्हें या तो अपने वाहनों को कबाड़ में बेचना होगा या उन्हें दिल्ली-एनसीआर के बाहर उपयोग करना होगा, जिससे उनकी आजीविका और गतिशीलता प्रभावित होगी। सरकार का तर्क है कि यह कदम वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हालांकि, ऑटो उद्योग को उम्मीद है कि इस प्रतिबंध से नए वाहनों की बिक्री में उछाल आएगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और सरकार को पंजीकरण शुल्क और करों के माध्यम से राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, सरकार को इस नीति के सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए समाधान खोजने की आवश्यकता है, जैसे कि पुराने वाहन मालिकों को रियायती दरों पर नए, पर्यावरण-अनुकूल वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहन या वित्तीय सहायता प्रदान करना।



