सीएसआर कॉनक्लेव में विकास और सामाजिक जिम्मेदारी पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा आज.
उद्योग मंत्री ने प्रभावित लोगों तक सीएसआर लाभ पहुंचाने पर दिया जोर.
रांची में आयोजित सीएसआर कॉनक्लेव 2026 में उद्योग और सामाजिक विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन उद्योग विभाग द्वारा किया गया। कॉनक्लेव में उद्योग मंत्री श्री Sanjay Prasad Yadav मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। मंत्री ने कहा कि सीएसआर राशि का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों के विकास में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री और माइन्स से प्रभावित लोगों को इसका सीधा लाभ मिलना जरूरी है। प्रदूषण और भूमि से प्रभावित लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री Hemant Soren राज्य के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। कंपनियों को सीएसआर राशि का शत-प्रतिशत उपयोग विकास कार्यों में करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि लोगों का हित राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और कॉर्पोरेट मिलकर बेहतर बदलाव ला सकते हैं। रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सीएसआर का बड़ा योगदान हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि विवाह भवन जैसी सुविधाओं के निर्माण से गरीब परिवारों को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सीएसआर राशि का उपयोग स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। मंत्री ने सीएसआर फंड की मॉनिटरिंग के लिए विशेष सेल बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। उन्होंने बड़ी कंपनियों के कार्यों की सराहना की। छोटी कंपनियों को भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी गई। उद्योग सचिव श्री Arava Rajkamal ने कहा कि कॉनक्लेव का उद्देश्य सीएसआर को गहराई से समझना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय जरूरी है। सीएसआर की प्राथमिकताओं और प्लानिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इससे लोगों की जरूरतों और कंपनियों के बीच का अंतर कम होगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए। कॉनक्लेव में सकारात्मक परिणामों की उम्मीद जताई गई।
उद्योग निदेशक श्री Vishal Sagar ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से सीएसआर की दिशा तय करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बचाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआर रूल 2014 के तहत झारखंड में कार्य हो रहा है। समय-समय पर नियमों में बदलाव भी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त राशि खर्च नहीं हो पा रही है। उद्योग निदेशक ने कॉर्पोरेट कंपनियों को सीएसआर नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कंपनी एक्ट 2013 के तहत सीएसआर कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। कार्यक्रम में स्किल ट्रेनिंग और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर भी चर्चा हुई। कॉनक्लेव में उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ।



