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खालिस्‍तानियों से बातचीत करना चाहता था भारत, ट्रूडो ने लगाया अड़ंगा, किसके आगे झुके थे कनाडा के पीएम?

भारत-कनाडा के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत और कनाडा दोनों ने ही एक दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। इस बीच एक दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार खालिस्तान समर्थकों के साथ बातचीत करने में लगी थी। लेकिन जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली कनाडाई सरकार ने इसे बाधित किया, जो चिंता बढ़ाने वाला है। कनाडा के एक कमेंटेटर ने खुलासा किया कि ट्रूडो सरकार खालिस्तानियों के दबाव में आ गई। नेशनल पोस्ट के कॉलमिस्ट टेरी ग्लैविन के मुताबिक मोदी सरकार ने 2016-17 में कनाडाई खालिस्तानियों के साथ बातचीत के लिए ब्रिटिश सिख कार्यकर्ता जसदेव सिंह राय की मदद मांगी।

मोदी सरकार कनाडा में रहने वाले उन खालिस्तान समर्थकों से बातचीत करना चाहती थी, जो खालिस्तान की मांग करते-करते बड़े हुए लेकिन उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ। राय ने कनाडा की कई यात्राओं के दौरान कनाडाई सिक्योरिटी और सीक्रेट सर्विस से मुलाकात की। ग्लेविन ने राय के हवाले से लिखा कि ट्रूडो सरकार खालिस्तानी नेताओं के ग्रुप के आगे झुक गई और शांति वार्ता की प्रक्रिया में बाधा डाली। राय को बाद में कनाडा में प्रतिबंधित कर दिया गया। हालांकि इसके बारे में विस्तार से नहीं लिखा गया।

खालिस्तान पर आंख मूंद लेते हैं ट्रूडो

उन्होंने आगे लिखा, ‘2018 में ट्रूडो भारत गए थे, जहां उनके कपड़ों का तमाशा बना। दोनों देशों के बीच तब खुफिया और सुरक्षा पर कनाडा-भारत सहयोग की डील हुई। लेकिन इसमें बेहद कम उपलब्धि हासिल की गई।’ ट्रूडो के आलोचकों का कहना है कि वह संप्रभुता और अलगाववाद को लेकर दोहरे मानदंड अपनाते हैं। एक तरफ तो वह खालिस्तान के एक्टिव हिंसक अलगाववादियों को लेकर आंख मूद लेते हैं। वहीं नई दिल्ली की ओर से वांटेड हरदीप सिंह निज्जर को मारने में भारत का हाथ बताते हैं।

अपने ही देश में घिरे ट्रूडो

भारत पर कीचड़ उछालने के लिए जबसे ट्रूडो ने बयान दिए हैं, तब से उनकी सरकार अपने ही देश में घिरी जा रही है। निज्जर के कनाडा की नागरिकता पाने के तरीके पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निज्जर एक फर्जी पासपोर्ट के जरिए 1997 में कनाडा गया था। तब सरकार ने उसे कनाडा में शरण देने से रोक दिया था। 11 दिनों बाद उसने एक कनाडाई महिला से शादी की और उसे शरण मिल गई। बाद में जब भारत ने उसे एक भगोड़ा आतंकी घोषित किया तब उसे अचानक कनाडा की नागरिकता मिल गई।

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