World

हिमाचल संकट तो बस झांकी है, कांग्रेस को अपने परंपरागत गढ़ों में झुलसाएगी राम मंदिर बायकॉट की तपिश

अयोध्या में बने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से दूरी बनाकर कांग्रेस ने क्या बड़ी गलती कर दी है? ये हम नहीं कह रहे बल्कि पार्टी में जारी उठापटक और नेताओं के कांग्रेस से हो रहे मोहभंग के चलते ये सवाल उठे हैं। इस एक फैसले की वजह से पार्टी आलाकमान को लगातार झटके लग रहे हैं। कई नेता राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व के फैसले को पचाने के मूड में नहीं दिख रहे। इसका ताजा उदाहरण हिमाचल में दिखा, जहां कांग्रेस की पूर्ण बहुमत सरकार पर ही संकट के बादल घिर चुके हैं। पार्टी के 6 विधायक कांग्रेस खेमा छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं। हिमाचल सरकार पर आए इस संकट की अहम वजह राम मंदिर पर पार्टी नेतृत्व का स्टैंड ही है। ये अकेला मामला नहीं है इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के दिग्गज नेता प्रमोद कृष्णम भी बागी हुए। जिन्हें बाद में कांग्रेस ने पार्टी से निष्काषित कर दिया।

इसलिए कांग्रेस में खड़ा हुआ सियासी तूफान

राम मंदिर कार्यक्रम के बहिष्कार संबंधी कांग्रेस आलाकमान के फैसले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। बीजेपी भी इस नाराजगी का फायदा उठाने और कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक कलह को भुनाने की तैयारी में है। लोकसभा चुनाव बेहद करीब हैं, ऐसे में कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली अमेठी-रायबरेली सीट पर सबकी निगाहें होंगी। दोनों ही सीटों के चुनाव गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी पार्टी एक चुनौतीपूर्ण फेज से गुजर रही है। हिमाचल प्रदेश में देखे गए राजनीतिक उथल-पुथल का असर कांग्रेस पार्टी के गढ़ अमेठी और रायबरेली में भी देखने को मिल सकता है। शिमला से अमेठी और रायबरेली की दूरी करीब 1000 किलोमीटर से ज्यादा है, लेकिन वहां उठा तूफान जल्द ही उत्तर प्रदेश में गांधी परिवार के गढ़ को प्रभावित कर सकता है।

अमेठी-रायबरेली में दिखेगा राम मंदिर मुद्दे का असर

अमेठी और रायबरेली को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे क्योंकि दोनों ही सीटें यूपी की हैं। अमेठी सीट पर राहुल गांधी 2019 का लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। उन्हें बीजेपी की दिग्गज नेता स्मृति ईरानी ने शिकस्त दी थी। वहीं रायबरेली की बात करें तो अब तक यहां से सोनिया गांधी सांसद रही हैं। हालांकि, इस बार वो राज्यसभा चली गई हैं। ऐसे में चर्चा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा इस सीट से दावेदारी कर सकती हैं। हालांकि, सूबे में जिस तरह का माहौल देखने को मिल रहा उसमें राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व के स्टैंड का असर इन सीटों पर आगामी लोकसभा चुनाव में नजर आ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button