रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। धनबाद जिले की होमगार्ड भर्ती से जुड़ी याचिका खारिज कर दी गई है। यह मामला वर्ष 2008 के विज्ञापन से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सभी नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की गई थी। साथ ही जांच की मांग भी की गई थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। खंडपीठ ने इसे PIL के योग्य नहीं माना। इसके बाद याचिका खारिज कर दी गई।
कोर्ट ने कहा कि सेवा मामलों में PIL स्वीकार नहीं होती। यदि किसी को शिकायत थी तो उसे व्यक्तिगत याचिका दायर करनी चाहिए थी। अदालत ने यह भी कहा कि 2008 की नियुक्तियां अब समाप्त हो चुकी हैं। इसलिए इस मामले में कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पाया कि संबंधित लोगों को पक्षकार नहीं बनाया गया। इससे याचिका कमजोर हो गई। सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लिया। याचिका को बिना लागत के खारिज किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने स्थानीयता नियम के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला दिया था। लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना। इस फैसले से कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट हुई है। सेवा मामलों में PIL की सीमाएं तय हैं। अदालत ने उचित प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया है। लोगों को सही तरीके से न्यायालय में जाना चाहिए। यह फैसला अन्य मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे कानूनी व्यवस्था मजबूत होगी। मामला अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।



