रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने नए उद्योगों को जीएसटी लाभ देने में हो रही देरी पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने राज्य सरकार की हाई पावर्ड कमेटी की कार्यशैली पर नाराजगी जतायी। कोर्ट ने कहा कि इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2016 और 2021 के तहत उद्योगों को समय पर लाभ मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि उद्योगों के दावों पर जल्द निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी को 30 दिनों का अंतिम समय दिया है। साथ ही मुख्य सचिव को स्वयं अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने कहा कि जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 16 जून 2026 को तय की गई है। उद्योगों की ओर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया ने दलीलें पेश कीं।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उद्योग निदेशालय की मदद ली जा रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कमेटी अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। अदालत ने माना कि कमेटी को खुद मामलों पर निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पहले दिये गये आदेशों का पालन समय पर नहीं किया गया। अदालत ने आदेश अनुपालन में देरी को गंभीर माना है। कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त दस्तावेज मांगने में भी काफी समय लगाया गया। इससे यह लगता है कि मामले को टालने का प्रयास किया गया। अदालत ने इस रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उद्योगों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही आदेशों की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
खंडपीठ ने कहा कि अगर तय समय के भीतर निर्णय नहीं लिया गया तो अवमानना की कार्रवाई होगी। अदालत ने कहा कि हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। मामले में कई औद्योगिक कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड और नरसिंह इस्पात लिमिटेड शामिल हैं। राज्य सरकार की नीति के अनुसार उद्योगों को जीएसटी राशि का 75 प्रतिशत वापस किया जाना है। याचिकाकर्ता उद्योग इसी लाभ की मांग कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि कमेटी ने न तो आदेश का पालन किया और न ही अनुपालन हलफनामा दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई तक निर्देशों का पालन करने को कहा है। अब इस मामले पर उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।



