झारखंड में मानसून की सुस्ती का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अंतिम दिनों में भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। किसान धान की खेती को लेकर चिंतित हैं। कई क्षेत्रों में खेत सूखे पड़े हैं। मिट्टी में नमी की भारी कमी देखी जा रही है। धान की रोपाई का काम प्रभावित हुआ है। बीज डालने की प्रक्रिया भी धीमी हो गई है। किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। समय पर बारिश नहीं होने से खेती पर संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार जून में सामान्य से 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सामान्य वर्षा 122.6 मिलीमीटर मानी जाती है। इस बार केवल 49.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। चतरा जिले में सबसे अधिक 100 प्रतिशत वर्षा की कमी रही है। पलामू में 95 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। लोहरदगा में 91 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। गढ़वा और साहिबगंज भी कम बारिश से प्रभावित हैं। अधिकांश जिलों में अल्प वर्षा की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। किसानों को मौसम की जानकारी दी जा रही है।
राजधानी रांची में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यहां 51 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके बावजूद राज्य के अधिकांश जिले सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। कुल 16 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। खेतों की तैयारी प्रभावित हो गई है। खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ समय पर बारिश को जरूरी बता रहे हैं। किसान अच्छी वर्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों की बारिश खेती के लिए महत्वपूर्ण होगी। मानसून की सक्रियता पर सभी की नजर बनी हुई है।


