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राधाकृष्ण किशोर ने सरकारी सुरक्षा लौटाकर लिया अनोखा प्रशासनिक निर्णय आज.

सुरक्षा वापस लेने के बाद भी पुलिस ने निगरानी जारी रखी.

रांची : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकारी सुरक्षा व्यवस्था लौटाने का निर्णय लिया है। उन्होंने वाई श्रेणी की सुरक्षा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले की प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है। शनिवार को उन्होंने स्पेशल ब्रांच के आईजी प्रभात कुमार को पत्र भेजा। इसी तरह जैप-1 डोरंडा के कमांडेंट सह रांची एसएसपी राकेश रंजन को भी पत्र लिखा। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था हटाने का अनुरोध किया। मंत्री ने अपने सरकारी आवास से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती समाप्त करने की बात कही। उन्होंने अतिरिक्त सुरक्षा को अनावश्यक बताया। पहले भी उन्होंने इस विषय पर पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा था। उन्होंने बताया कि 29 जून को सुरक्षा वापस लेने का अनुरोध किया जा चुका है।

निर्णय के बाद उनकी सुरक्षा में लगे 16 पुलिसकर्मियों को वापस बुला लिया गया। सुरक्षा ड्यूटी में लगाए गए सरकारी वाहन भी विभाग को लौटा दिए गए। इनमें तीन बोलेरो और एक जिप्सी शामिल हैं। इसके बावजूद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं की। सुरक्षा कर्मी निर्धारित दूरी से उनकी गतिविधियों पर नजर रखते रहे। मंत्री शनिवार को प्रोजेक्ट भवन पहुंचे तो पुलिस आसपास मौजूद रही। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। शाम को उनके अशोक नगर स्थित आवास के आसपास भी पुलिस की निगरानी जारी रही। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया। प्रशासन ने न्यूनतम सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का फैसला किया है।

मंत्री ने कहा कि वह उग्रवाद प्रभावित इलाके से आते हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम करने का लंबा अनुभव होने की बात कही। उनका विश्वास है कि आत्मबल सबसे बड़ी सुरक्षा है। उन्होंने अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत से इनकार किया। पुलिस प्रशासन ने इस निर्णय के बाद भी आवश्यक सतर्कता बरती है। रांची जिला पुलिस ने मंत्री के निजी सचिव से भी संपर्क किया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे भी समन्वय बनाए रखा जाएगा। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। कई लोग इसे अलग सोच वाला कदम मान रहे हैं। हालांकि इस संबंध में मंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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