
लातेहार की अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी उत्कर्ष जैन की अदालत ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने मां अंबे ज्वेलर्स मनिका के प्रोपराइटर दीपक कुमार को एक वर्ष की कारावास की सजा दी। साथ ही शिकायतकर्ता अभय कुमार को 2.5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश भी जारी किया। मामला शिकायतवाद संख्या 47/2024 से संबंधित था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से विभिन्न दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत की गईं। न्यायालय ने सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद निर्णय सुनाया। अदालत ने आरोपी को चेक बाउंस का दोषी माना। फैसला सुनाए जाने के बाद मामले को लेकर कानूनी हलकों में चर्चा शुरू हो गई। यह निर्णय एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दिया गया है।
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से मानसिक बीमारी का तर्क दिया गया था। अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी को जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त हैं। अदालत ने माना कि आरोपी भुगतान करने की स्थिति में था। इसके आधार पर उसे दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि चेक जारी करना एक कानूनी प्रतिबद्धता है। उसका सम्मान किया जाना आवश्यक है। मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलों को भी न्यायालय ने महत्व दिया। इसके बाद दोषसिद्धि का आदेश पारित किया गया।
मामले के अनुसार आरोपी ने शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक भारतीय स्टेट बैंक की मनिका शाखा से जारी किया गया था। जब चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया तो वह बाउंस हो गया। बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की जानकारी दी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी कार्रवाई शुरू की। न्यायालय में मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। बताया गया है कि आरोपी के खिलाफ इसी तरह के अन्य मामले भी लंबित हैं। इस फैसले को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेशानुसार होगी।



