रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले को फिलहाल रोक दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से हटाने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। कोर्ट ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि उचित प्रक्रिया के बिना नियुक्ति रद्द करना संवैधानिक रूप से सही नहीं है। कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को वापस काम पर लेने का निर्देश दिया। साथ ही सरकार से पूरे मामले पर जवाब मांगा है। सरकार को 15 सितंबर तक अपना जवाब अदालत में दाखिल करना होगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सीआईडी जांच की स्थिति अदालत के सामने रखी। सरकार ने बताया कि जांच में अब तक करीब 40 प्रतिशत गड़बड़ी सामने आई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का काम अभी जारी है। इसके बाद अदालत ने कहा कि 40 प्रतिशत गड़बड़ी के कारण बाकी 60 प्रतिशत अभ्यर्थियों को सजा नहीं दी जा सकती।
अदालत में दो याचिकाएं दीपमाला एवं अन्य और सोनम कुमारी की ओर से दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन संख्या 1/2024 को रद्द करने के सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है। तीसरी याचिका सौरव सिंह एवं अन्य की ओर से फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन संख्या 18/2023 को लेकर दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्तियां रद्द किए जाने को अनुचित बताते हुए अदालत से राहत की मांग की है। सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने दूसरी नौकरी छोड़कर इस पद को स्वीकार किया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र जारी हुआ था। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया था। लेकिन सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर नियुक्ति रद्द कर दी। उन्होंने अदालत से इस अधिसूचना को निरस्त करने का आग्रह किया। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, प्रेरणा झुनझुनवाला और पीएएस पति ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिल गई है।
बताया गया है कि सीआईडी जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कई परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। सरकार के अनुसार इन परीक्षाओं में टीडीपीएल से जुड़े तथ्यों को भी जांच में शामिल किया गया है। सरकार ने वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की थी। इसके बाद कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्षा रद्द करने और जांच से जुड़ी अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया है। छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है। हाईकोर्ट ने जांच में सामने आने वाली गड़बड़ियों पर अलग से कार्रवाई करने की बात कही है। अदालत ने संबंधित मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने का सुझाव भी दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।



