रांची : समाधान समारोह यानी विशेष लोक अदालत के माध्यम से एक लंबे समय से लंबित विवाद का निपटारा किया गया है। झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी ने 116 मामलों को मध्यस्थता के लिए डीएलएसए, रांची भेजा था। रांची में इन सभी मामलों की मध्यस्थता करायी गयी। दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल किया गया। प्रक्रिया वर्चुअल और फिजिकल दोनों मोड में आयोजित हुई। इनमें 10 मामलों में दोनों पक्षों के बीच सुलह करायी गयी। एक महत्वपूर्ण मामला टाटा स्टील लिमिटेड और झारखंड सरकार के कमर्शियल टैक्स विभाग से संबंधित था। यह विवाद करीब 50 वर्ष पुराना बताया गया है। वर्ष 2019 से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट में मामले की संख्या सीए 4061/2019 थी।
मामले की शुरुआत वर्ष 1977-78 में हुई थी। उस समय कमर्शियल टैक्स विभाग ने टाटा स्टील पर 68,39,946 रुपये का पेनल्टी लगाया था। टाटा स्टील ने इसके खिलाफ 25 लाख रुपये जमा किए थे। इसके बाद कंपनी ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय ने कमर्शियल टैक्स विभाग के पेनल्टी आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद विभाग ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील की थी। मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। लंबे समय तक मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित रहा। समाधान समारोह के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को चिन्हित किया। झालसा ने इसके बाद मामले को मध्यस्थता केंद्र, रांची भेजा। यहां दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया शुरू की गयी।
मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 10 बैठकें हुईं। झारखंड सरकार की ओर से कमर्शियल टैक्स विभाग के नोडल ऑफिसर सहायक आयुक्त संजय प्रसाद ने प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित झारखंड कर समाधान योजना-2026 के तहत विवाद के समाधान पर चर्चा हुई। टाटा स्टील के विधि विभाग से विकास मित्तल और आकर्षण कुमार ने बातचीत में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने कई दौर की बातचीत के बाद समझौते पर सहमति जतायी। तय हुआ कि 25 लाख रुपये के भुगतान के बाद शेष राशि की पांच प्रतिशत राशि जमा की जाएगी। यह राशि 30 दिनों के भीतर कमर्शियल टैक्स विभाग को दी जाएगी। दोनों पक्षों ने इस सहमति के आधार पर पुराने विवाद को समाप्त कर दिया। डीएलएसए, रांची की मध्यस्थता से मामले का समाधान संभव हुआ। इसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के सचिव ने दी।



