झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण विभाग से जुड़े एक मामले में अहम फैसला दिया है। अदालत ने सेवानिवृत्त सहायक अभियंता अरविंद कुमार श्रीवास्तव को नॉशनल पदोन्नति देने का निर्देश दिया है। उन्हें 23 नवंबर 2009 से कार्यपालक अभियंता के पद पर पदोन्नत माना जाएगा। कोर्ट ने यह लाभ उनके कनिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति की तारीख के आधार पर दिया है। अदालत ने इस मामले में सड़क निर्माण विभाग के प्रधान सचिव के आदेश को रद्द कर दिया। प्रधान सचिव ने 25 अगस्त 2023 को उनकी नॉशनल प्रमोशन की मांग खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने उस फैसले को उचित नहीं माना। अदालत ने राज्य सरकार को नॉशनल पदोन्नति देने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। विभाग को अदालत के आदेश की प्रति मिलने के 12 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इस फैसले से याचिकाकर्ता के सेवा रिकॉर्ड में उनकी पदोन्नति की स्थिति बदल जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव की सरकारी सेवा की शुरुआत 9 दिसंबर 1982 को हुई थी। उन्हें सड़क निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर नियुक्त किया गया था। करीब पांच साल बाद 11 दिसंबर 1987 को उन्हें सहायक अभियंता बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2009 में उनके कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को कार्यपालक अभियंता पद पर पदोन्नति दी गई। उनका दावा था कि वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें उस समय पदोन्नति नहीं मिली। बाद में विभाग की वरिष्ठता सूची में बदलाव किया गया। संशोधित सूची में उनकी वरिष्ठता उन अधिकारियों से ऊपर हो गई, जिन्हें वर्ष 2009 में प्रमोशन मिला था। इसके आधार पर उन्होंने कार्यपालक अभियंता पद पर नॉशनल प्रमोशन की मांग की। उन्होंने अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत में उन्होंने अपने पक्ष से जुड़े सेवा रिकॉर्ड और तथ्यों को रखा।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्हें किसी तरह का वित्तीय लाभ नहीं चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें एसीपी और एमएसीपी के तहत कार्यपालक अभियंता के ग्रेड-पे का लाभ पहले ही मिल चुका है। उनकी मांग केवल नॉशनल पदोन्नति और कार्यपालक अभियंता का पदनाम देने की थी। अदालत ने इस तथ्य को भी अपने फैसले में ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि नॉशनल पदोन्नति का प्रभाव केवल सेवा संबंधी रिकॉर्ड तक सीमित रहेगा। इससे उन्हें अतिरिक्त वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। उनकी पेंशन में भी इस आधार पर बढ़ोतरी नहीं होगी। पदोन्नति से जुड़े अन्य मौद्रिक लाभ भी उन्हें नहीं मिलेंगे। सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार आवश्यक आदेश जारी करना होगा। निर्धारित 12 सप्ताह की अवधि में विभाग को पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अरविंद कुमार श्रीवास्तव को 2009 से कार्यपालक अभियंता का नॉशनल दर्जा मिलेगा।



