झारखंड में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर निगरानी के लिए प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद शिकायतों के निस्तारण की तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। पिछले दो वित्तीय वर्षों में इस संबंध में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 859 शिकायतें विभाग के सामने आईं। इनमें 416 मामलों की कार्रवाई रिपोर्ट ही विभाग तक पहुंच सकी। बाकी 443 मामलों की एटीआर अभी लंबित बताई गई है। इसका अर्थ है कि आधे से अधिक शिकायतों की कार्रवाई रिपोर्ट विभाग को नहीं मिली है। शिकायतों की जांच में देरी से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल हो सकता है। इससे सरकार के राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका भी बनी रहती है। वहीं कार्रवाई में देरी अवैध खनन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत का कारण बन सकती है।
विभाग ने खनिजों की निगरानी के लिए अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। माइनिंग इंस्पेक्टर और असिस्टेंट माइनिंग ऑफिसर प्रारंभिक स्तर पर मामलों की निगरानी करते हैं। जिला खनन पदाधिकारी के अलावा डिप्टी डायरेक्टर माइंस और क्षेत्रीय अधिकारी भी व्यवस्था में शामिल हैं। शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को उसकी जांच करनी होती है। जांच में अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करना अपेक्षित है। कार्रवाई पूरी होने के बाद उसकी एटीआर विभाग को भेजी जानी चाहिए। धनबाद में इस व्यवस्था की स्थिति सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। जिले में दो वर्षों के दौरान 120 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 2024-25 के 87 और 2025-26 के 33 मामले शामिल हैं। विभाग को इनमें सिर्फ 26 मामलों की एटीआर मिली, जबकि 94 रिपोर्ट लंबित हैं।
पाकुड़ में कुल 93 शिकायतों में से 67 की एटीआर विभाग को मिली है। गिरिडीह में 73 शिकायतों के मुकाबले 29 मामलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। साहिबगंज में दर्ज 75 शिकायतों में से किसी की भी एटीआर विभाग को नहीं भेजी गई। रांची में कुल 64 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 31 की रिपोर्ट मिली और 33 लंबित हैं। दूसरी ओर रामगढ़, गुमला, खूंटी और सिमडेगा में सभी शिकायतों की एटीआर भेजी गई है। अवैध परिवहन पर निगरानी के लिए कई जिलों में चेकपोस्ट की व्यवस्था भी है। धनबाद सहित कई जिलों में चेकपोस्ट चल रहे हैं, फिर भी अवैध परिवहन की शिकायतें सामने आती हैं। चतरा, जामताड़ा, गोड्डा, खूंटी और देवघर ने चेकपोस्ट स्थापित करने के लिए राशि की मांग की है। रांची, लातेहार, गिरिडीह, चाईबासा और लोहरदगा में चेकपोस्ट नहीं चलने से निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।



