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‘फैक्ट से खिलवाड़, अजेंडा…नहीं पता ये समझना इतना मुश्किल क्यों’, जब जयशंकर ने पत्रकार को पढ़ाया पाठ

विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी वाकपटुता और बिना लाग-लपेट के सीधे बात कहने के लिए जाने जाते हैं। न्यूयॉर्क में काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस के कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का पश्चिम के एक पत्रकार को दिया जवाब काफी चर्चित हो रहा है। फॉरेन अफेयर्स से जुड़े पत्रकार ने विदेश मंत्री से भारत के डेमोक्रेसी स्कोर को हाल में डाउनग्रेड किए जाने को लेकर सवाल किया था। इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट पक्षपाती होती हैं और उनका इस पर जवाब बहुत स्पष्ट है। जयशंकर ने कहा कि ऐसी तमाम रिपोर्ट गलत होती हैं और इसके पीछे विचारधारा से जुड़ा अजेंडा होता है। उन्होंने हैरानी जताई कि इतनी सी बात आखिर क्यों समझ में नहीं आ रही।

वैसे भी ह्यूमन इंडेक्स, हैपीनेस इंडेक्स से लेकर डेमोक्रेसी इंडेक्स तक पर अक्सर विवाद होता रहा है। खुशहाली इंडेक्स को ही लें तो आर्थिक रूप से बदहाल और गृहयुद्ध के कगार पर खड़े कई देश भी रैंकिंग में भारत से ऊपर जगह पा जाते हैं। मिसाल के तौर पर हैपीनेस इंडेक्स में श्रीलंका और पाकिस्तान तक भारत से ऊपर हैं। पिछले साल भी श्रीलंका भारत से ऊपर था, वह भी तब जब वह अभूतपूर्व आर्थिक संकट और महंगाई से गुजर रहा था। भारत इस तरह की रिपोर्ट को विश्वास न करने योग्य, पक्षपाती और अजेंडा वाला बताकर खारिज करता रहा है।

पत्रकार ने एस. जयशंकर से सवाल पूछने से पहले लंबी-चौड़ी भूमिका बनाई। उसने एक अन्य पत्रकार को दिए विदेश मंत्री के जवाब का हावाल देते हुए कहा कि उनके उत्तर से यह साफ नहीं हुआ कि क्या जयशंकर इससे चिंतित हैं कि ऐसी रिपोर्ट ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत के आड़े आएंगी। जब पत्रकार भूमिका बना रहा था तब विदेश मंत्री ने कहा, ‘मुझे लगा कि आप मुझसे कोई सवाल पूछने वाले थे।’

इस पर पत्रकार ने कहा, ‘हां, मैं आपसे सवाल पूछ रहा हूं। आपने कहा कि ये सब पाखंड है। हम दुनिया के स्वयंभू संरक्षक हैं जिन्हें ये बात नागवार लगती है कि भारत में कोई ऐसा भी है जो हमारी स्वीकृति का परवाह नहीं करता और उनके इशारों पर नहीं नाचता। लेकिन यह असल में पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं है। इसलिए मैं आपसे फिर पूछना चाहता हूं। क्या आप इसे लेकर चिंतित हैं कि डेमोक्रेसी स्कोर के मामले में गिरावट दुनिया में एक उभरती हुई शक्ति बनने की भारत की कोशिशों के लिए झटका है?’

जवाब में जयशंकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर आप निष्पक्ष हैं तो जवाब को समझ सकते हैं। मुझे लगता है कि जवाब में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि जो लोग इन रिपोर्ट को लिखते हैं, वे पक्षपाती हैं, उनमें पूर्वाग्रह है। अक्सर वे तथ्यों को तोड़ते-मरोड़ते हैं। ऐसी तमाम रिपोर्ट में गलतियों की भरमार होती हैं। इसलिए मैं आप पर छोड़ता हूं कि इसमें विचारधारा से जुड़ा अजेंडा होता है। मुझे नहीं पता कि यह समझना इतना मुश्किल क्यों है।’

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