रांची : राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रूपेश कुमार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें दूसरी बार निलंबित कर दिया है। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने एक अन्य व्यक्ति के खतियान और गलत शपथ-पत्र का उपयोग कर पिछड़ा वर्ग-1 का प्रमाण-पत्र हासिल किया था। इसी के आधार पर उन्होंने महत्वपूर्ण जेपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी। जांच अधिकारियों ने इस पूरे मामले को योजनाबद्ध फर्जीवाड़ा बताया है।
वर्ष 2016 में उनके खिलाफ विभागीय प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसमें बर्खास्तगी की दिशा में कदम बढ़ाया गया था। इसके जवाब में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रक्रिया रोकने की कोशिश की। हालांकि 18 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट के निर्देश ने मामले को फिर से सक्रिय कर दिया। नए आरोपों की समीक्षा के दौरान उनकी पत्नी ने मानवीय आधार पर राहत की मांग की थी, जिसमें परिवार की आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का उल्लेख था।
इसके बावजूद विभाग ने आरोपों की गंभीरता को प्राथमिकता दी और जांच लंबित रहने तक निलंबन कायम रखने का फैसला किया। अब उन्हें हजारीबाग स्थित उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल कार्यालय में मुख्यालयित किया गया है। यह कदम मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।



