झारखंड हाईकोर्ट ने भुरकुंडा कॉलेज विवाद पर फैसला दिया। मामला फिजिक्स लेक्चरर नियुक्ति से जुड़ा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग अस्वीकार कर दी। यह विवाद लंबे समय से चल रहा था। अदालत ने सभी तथ्यों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने अपने तर्क पेश किए थे। कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को वैध माना। फैसले के बाद विवाद समाप्त माना जा रहा है। कॉलेज प्रशासन को राहत मिली है। यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में अहम माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता अरविंद शरण ने वर्ष 2001 में याचिका दायर की थी। उन्होंने बीसीएससी की सिफारिश का हवाला दिया था। उन्होंने दावा किया कि वे नियुक्ति के योग्य थे। उन्होंने 1994 के विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। याचिकाकर्ता ने आरक्षण नीति उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी योग्यता और इंटरव्यू सफलता का उल्लेख किया। उनका कहना था कि कॉलेज ने नियुक्ति नहीं दी। हस्तक्षेपकर्ता ने अलग दलील दी। उन्होंने कहा कि पद संख्या सीमित थी। इसलिए आरक्षण लागू नहीं हो सकता था।
बिनोद कुमार सिंह वर्ष 2000 से कॉलेज में कार्यरत हैं। उन्होंने करीब 25 वर्षों तक सेवा दी है। कोर्ट ने सेवा अवधि का भी अध्ययन किया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता का दावा खारिज कर दिया। फैसले के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को सही माना गया। यह निर्णय कॉलेज प्रशासन के पक्ष में गया है। विशेषज्ञों ने इसे अहम फैसला बताया है। इससे नियुक्ति विवाद कम हो सकते हैं। शिक्षा संस्थानों को इससे मार्गदर्शन मिलेगा। यह फैसला प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगा।


