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अखिलेश ने योगी को बताई ‘राष्ट्रीय नेता’ बनने की तरकीब, BJP विधायकों ने मजे ले लिए

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही हंगामा शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत के पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मुद्दों को लेकर सदन में सार्थक चर्चा करने के लिए विपक्ष को साथ आने की अपील की। लेकिन, विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों का हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष के विधायक यूपी विधानसभा की बेल में पहुंच गए। वे मणिपुर हिंसा और टमाटर के मूल्य में वृद्धि के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाते हुए देश के सबसे बड़े राज्य की विधानसभा में इस पर बहस की मांग कर दी। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विधानसभा की कार्यवाही को जारी रखा। हालांकि, लगातार हंगामा के बाद उन्होंने कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया।विधानसभा अध्यक्ष ने नियमावली के तहत उत्तर प्रदेश से बाहर का मुद्दा नहीं उठाए जाने की बात कही, इस पर अखिलेश यादव अलग ही तर्क देते दिखे। उन्होंने पहले तो कहा कि देश का सबसे बड़ा राज्य यूपी है। यहां की विधानसभा में देश के एक राज्य में हुई घटना पर चर्चा होनी चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने इसका प्रदेश से कोई जुड़ाव नहीं बताया। इस पर अखिलेश ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ तो हर प्रदेश में वोट मांगने जाते हैं। उनकी मांग राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले चुनावों में होती है। मणिपुर चुनाव में भी वोट मांगने गए थे। इसलिए, मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा कर लोगों के बीच बनी डर की भावना को दूर किया जाना जाना चाहिए।सीएम योगी पर तंज साधते हुए उन्होंने कहा कि मणिपुर मुद्दे पर बोलकर उन्हें देश की आवाज बन जाना चाहिए। हम तो चाहते हैं कि वे देश की आवाज बनें। इस पर भाजपा खेमे से एक सदस्य की आवाज गूंजी, चलिए आपने मान लिया, सीएम योगी आदित्यनाथ राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। अखिलेश की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मणिपुर में जो कुछ हुआ, वह गलत है। लेकिन, हम इस पर विधानसभा में चर्चा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मणिपुर, पश्चिम बंगाल और केरल में क्या हो रहा है? यह उन राज्यों का विषय है। उसकी जहां पर चर्चा होनी चाहिए, वहां हो। हम यहां पर चर्चा करने के लिए नहीं बैठे हैं।

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