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भारत में शिशु और बुजुर्गों पर बढ़ रहा गर्मी का खतरा: लैंसेट रिपोर्ट

लैंसेट की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शिशु और बुजुर्गों को पिछले एक दशक में गर्मी की लहरों का अधिक सामना करना पड़ रहा है।

साल 2023 में, भारतीयों को लगभग 2400 घंटे या 100 दिनों तक मध्यम या उच्च स्तर की गर्मी के तनाव का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी की लहरें अधिक तीव्र और लंबी हो रही हैं। इससे विशेष रूप से शिशु और बुजुर्ग लोग प्रभावित हो रहे हैं। इन लोगों के शरीर गर्मी को सहन करने में कम सक्षम होते हैं और उन्हें गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है।

क्यों है यह चिंता का विषय?

गर्मी की लहरें स्वास्थ्य के लिए कई तरह के खतरे पैदा करती हैं, जैसे कि हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हृदय रोग। ये खतरे शिशुओं और बुजुर्गों के लिए और भी अधिक गंभीर हो सकते हैं।

क्या किया जा सकता है?

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और अन्य संगठनों को मिलकर काम करना होगा। इसमें जलवायु परिवर्तन से लड़ना, गर्मी से संबंधित बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाना और गर्मी से बचाव के उपायों को बढ़ावा देना शामिल है।

मुख्य बिंदु:

  • शिशु और बुजुर्ग लोग गर्मी से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
  • गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन से लड़ना जरूरी है।

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