मोदी से मिलकर खिलखिलाए पवार, पीठ पर फेरा हाथ… 2024 से पहले यह तस्वीर बहुत कुछ कहती है
धड़कनें धड़कनों में खो जाएं
दिल को दिल के करीब लाना है
यह गीत तो वैसे फिल्मी है लेकिन आज पुणे की एक तस्वीर देखकर विपक्षी गठबंधन के नेताओं की धड़कनें जरूर बढ़ गई होंगी। जी हां, राजनीति में मिलने-बिछड़ने का सिलसिला पुराना है। पुणे के एक मंच पर जब एनसीपी चीफ शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले तो ‘दिल को दिल के करीब लाना’ वाली लाइन यूं ही सियासी जानकारों के जेहन में गूंजने लगी। क्या 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कुछ बड़ा गेम होने वाला है। क्या पिछले दिनों एनसीपी का शिंदे सरकार के साथ जाना सोची समझी रणनीति थी? ऐसे सवाल तो उसी दिन से उठ रहे हैं जिस दिन अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे। लेकिन आज मोदी-पवार की गर्मजोशी देख फिर से बातें होने लगी हैं। ‘खानदान’ फिल्म के खाने की अगली लाइनें भी ध्यान से याद कीजिए- ख़्वाब तो कांच से भी नाज़ुक है, टूटने से इन्हें बचाना है। पवार की मुस्कुराहट देखकर कांग्रेस ही नहीं पूरे विपक्षी गठबंधन को यह डर सताने लगा होगा कि उन्हें अब किसी टूट से बचाना होगा।
दरअसल, राजनीति में हंसने, मुस्कुराने, थपकी देने के भी अपने मायने होते हैं। आज जब कुछ इसी अंदाज में शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई तो चर्चा चल पड़ी। पवार की अपनी बनाई पार्टी टूटी, सत्ता छूटी, पिछले दिनों तक वह मोदी की आलोचना कर रहे थे लेकिन आज की तस्वीर कुछ अलग थी। मोदी से मिलकर पवार खिलखिलाकर हंस रहे थे। यह तस्वीर कुछ दिन पहले ही बने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के नेताओं को चुभ रही होगी। उन्होंने लाख कोशिशें की थीं कि मोदी के साथ पवार मंच साझा न करें लेकिन महाराष्ट्र के सियासी चाणक्य नहीं मानें। वह आज के कार्यक्रम के लिए कितना बेताब थे, वह आप ऐसे समझिए कि पुणे के उस मंच पर सबसे पहले जाकर बैठ गए थे। जी हां, तस्वीर देखिए अभी कोई भी गेस्ट नहीं आया है और शरद पवार मंच पर अकेले बैठे हुए हैं।



