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दिल्ली की बाढ़ में श्मशान भी डूबा, निगम बोध घाट पर अस्थियां तक नहीं चुन पाए लोग

बुराड़ी के संत नगर में रहने वाले महेंद्र की बहन का मंगलवार को निधन हो गया था। आईएसबीटी कश्मीरी गेट स्थित निगम बोध श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया था। पारंपरिक मान्यताओं के चलते बुधवार को परिवार अस्थियां चुनने नहीं आया। गुरुवार की सुबह महेंद्र जब अपने कुछ परिजनों के साथ बहन की अस्थियां चुनने निगम बोध घाट पहुंचे, तो दंग रह गए। पूरा श्मशान घाट बाढ़ के पानी में डूबा हुआ था और बाहर सड़क तक पानी जमा था। ऐसे में परिजनों ने श्मशान घाट के बाहर खड़े होकर ही बाकी के रीति-रिवाज पूरे किए। महेंद्र ने कहा कि अंदर 6-6 फुट पानी भरा हुआ है। हम तो अब यही मानकर चल रहे हैं कि अस्थियां यमुना जी में विसर्जित हो गई होंगी, इसलिए अब हम यहीं बाहर से बाकी के क्रियाकर्म करके चले जाएंगे।

श्मशान के अंदर तक नहीं जा सके

तीस हजारी से आए गोल्डी सिंह ने बताया कि दो दिन पहले उनकी बुआ के लड़के की डेथ हो गई थी। गुरुवार की सुबह जब वे लोग फूल चुनने आए, तो देखा कि बाहर तक पानी भरा हुआ था। उन्होंने फोन पर परिजनों से बात की और फिर पंडित जी के कहे अनुसार बाहर से ही बाकी के क्रियाकर्म पूरे किए। मजनूं का टीला इलाके में रहने वाले रामेश्वर ने कहा कि मैंने अपने 56 साल के जीवन काल में कभी ऐसा होते नहीं देखा था। वह अपने जीजा जी के फूल चुनने आए थे, लेकिन श्मशान घाट के अंदर ही नहीं जा पाए। उन्होंने कहा कि अस्थियां तो अब सब बह गई होंगी और क्रियाकर्म का सामान वापस घर नहीं ले जा सकते, इसलिए अब हम लोग यहीं बाहर से बाकी के विधि विधान पूरे करेंगे।

वोट का इंतजाम करते दिखे लोग

गाजियाबाद के वैशाली से आए पंकज निगम बोध घाट के आस-पास लोगों से बात करके एक बोट का इंतजाम करने की कोशिश रहे थे, ताकि किसी तरह उसके जरिए अंदर जाकर पिताजी की अस्थियां चुन सकें, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पा रही थी। उनके पिता का बुधवार को निधन हुआ था। उन्होंने बताया एक पंडित जी से बात हुई है। उन्होंने हमें सुरक्षित तरीके से अंदर तक ले जाने की बात कही है। हम उनके साथ अंदर जाकर अस्थियां चुनने की कोशिश करेंगे। निगम बोध श्मशान घाट के बाहर गुरुवार की सुबह से लगातार ऐसे ही लोग आते जा रहे थे और उन्हें बाहर से ही अंतिम क्रिया कर्म पूरे करके वापस लौटना पड़ रहा था, क्योंकि चारों तरफ बस पानी ही पानी था।

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