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तमिल संगमम से लेकर त्रिशूर में महिला संगमम तक, कैसे चुपके-चुपके दक्षिण में पैठ बढ़ा रहे मोदी

लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने लिए ‘अबकी बार 400 पार’ का लक्ष्य दिया है। कार्यकर्ताओं को 50+% का महत्वाकांक्षी टारगेट दिया गया है। लेकिन क्या ये इतना आसान है? खासकर तब जब तमाम राज्यों में बीजेपी की सीटें पहले ही अपने चरम पर हैं यानी अब सीटें बढ़ने से रहीं, हां घट जरूर सकती हैं। ऐसे में बीजेपी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक का लक्ष्य कैसे पूरा करेगी? बीजेपी को बखूबी पता है कि लक्ष्य आसान नहीं लेकिन मोदी की अगुआई में पार्टी धीरे-धीरे दक्षिण में भी अपनी पैठ बढ़ा रही है। काशी-तमिल संगमम से लेकर त्रिशूर में महिला संगमम तक, नरेंद्र मोदी चुपके-चुपके दक्षिण में बीजेपी की पैठ बढ़ा रहे हैं। तमिलनाडु दौरे के अगले दिन बुधवार को पीएम मोदी केरल में ‘2 लाख महिलाओं’ की रैली के जरिए दक्षिण भारत में बीजेपी के लोकसभा अभियान का शंखनाद कर चुके हैं।

केरल के त्रिशूर में ‘नारी शक्ति मोदीकोप्पम महिला संगमम’ के जरिए बीजेपी शक्तिप्रदर्शन कर रही है। पार्टी का दावा है कि ये कार्यक्रम अभूतपूर्व है क्योंकि दक्षिण भारत में किसी भी पार्टी के कार्यक्रम में महिलाओं की इतनी बड़ी भागीदारी नहीं हुई है। ये कार्यक्रम ऐतिहासिक महिला आरक्षण कानून को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने पर केरल की महिलाओं की तरफ से पीएम मोदी को धन्यवाद देने के लिए है।

बिना किसी शोरशराबे के बीजेपी चुपचाप दक्षिण में अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटी है। कांग्रेस के हाथों कर्नाटक हारने के बाद अभी दक्षिण के किसी राज्य में उसकी सरकार नहीं है। लेकिन पार्टी लगातार वहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा चुनाव में पार्टी ने न सिर्फ 8 सीटों पर जीत दर्ज की बल्कि अपना वोटशेयर भी दोगुना किया। 2018 में सूबे में पार्टी को 6.2 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार बढ़कर 14 प्रतिशत के करीब रहा। इतना ही नहीं, कामरेड्डी सीप पर तो बीजेपी के के. वेंकट रमन रेड्डी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी दोनों को शिकस्त दी। हालांकि, दोनों नेता अपनी-अपनी दूसरी सीट से जीतने में सफल रहे और कांग्रेस के रेवंत रेड्डी तो मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। पार्टी का ये प्रदर्शन बताता है कि तेलंगाना में उसका प्रदर्शन कोई तुक्का नहीं है।

महिलाओं के जरिए बीजेपी का साउथ में कमल खिलाने का प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी ने पिछले कई सालों की कोशिशों से धीरे-धीरे एक नया वोट बैंक तैयार करने में सफलता हासिल की है। ये नया वोट बैंक है आधी आबादी यानी महिलाओं का। ऐतिहासिक महिला आरक्षण बिल को संसद से पास कराना उसी दिशा में एक अहम कदम है। एक ही बार में तीन बार तलाक बोलकर महिला से रिश्ता खत्म करने की बुराई तलाक-ए-बिद्दत को बैन करने से मुस्लिम महिलाओं को फायदा पहुंचा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्यों की कई बीजेपी सरकारें महिलाओं को सीधा फायदा पहुंचाने वाली कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। केंद्र सरकार की बात करें तो उसकी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन अकाउंट, मिशन पोषण, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन, मैटरनिटी लीव को 12 की जगह 26 हफ्ते करना, मातृवंदन योजना के तहत बच्चे के जन्म पर मां को 5000 रुपये जैसी तमाम योजनाएं महिलाओं पर ही केंद्रित हैं। आर्मी में महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने जैसे कदम से समान अवसर और समानता का अधिकार देने की कोशिश की। उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन का लाभ मिला है। अभी अयोध्या में पीएम मोदी ने उज्ज्वला योजना की 10 करोड़वीं लाभार्थी से मुलाकात की थी। इसके अलावा जनधन योजना के तहत 27 करोड़ महिलाओं का बैंक में खाता खुला है। बैंक से बिना गारंटी के कर्ज वाली मुद्रा लोन योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। स्टैंड अप इंडिया स्कीम के लाभार्थियों में भी आधे से ज्यादा महिलाएं हैं। चुनावों में बीजेपी को मोदी सरकार की इन स्कीम का लाभ मिलता रहा है।

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