चीन को मिलेगा जवाब और समुद्री लुटेरों की खैर नहीं …समंदर में नेवी के इस ‘जटायु’ से बचना अब मुश्किल
भारतीय नौसेना लक्षद्वीप द्वीपसमूह में सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए मिनिकॉय द्वीप पर एक हाईटेक नौसैनिक अड्डा स्थापित किया है। इसे आईएनएस जटायु के रूप में जाना जाएगा। मिनिकॉय में 1980 के दशक से ही भारतीय नौसेना की एक टुकड़ी थी, लेकिन आईएनएस जटायु लक्षद्वीप में दूसरा नौसैनिक अड्डा होगा। इस अड्डे से नौसेना टुकड़ी की मूवमेंट बढ़ेगी और यह पश्चिमी अरब सागर में समुद्री डकैती और ड्रग्स के खिलाफ अभियानों में तेजी आएगी। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बुधवार नए अड्डे की शुरुआत की। आईएनएस जटायु की शुरुआत के बाद उन्होंने कहा कि अड्डे का नाम रामायण के उस पात्र के नाम पर रखा गया है जिसने सीता के अपहरण को रोकने की कोशिश की थी।
आखिर जटायु ही नाम क्यों रखा
नौसेना प्रमुख ने कहा कि रामायण में जटायु ने सबसे पहले कदम उठाते हुए सीता जी के अपहरण को रोकने की कोशिश की। अपने जीवन को खतरे में डालकर, स्वयं से पहले सेवा का उदाहरण दिया। इसलिए इसका नाम जटायु रखना सुरक्षा निगरानी और निस्वार्थ सेवा प्रदान करने की भावना की एक उपयुक्त मान्यता है। आर हरि कुमार ने कहा कि जटायु द्वारा भगवान राम को दी गई जानकारी से हालात का पता चला और आगे विजयी हुए। उन्होंने कहा इसी तरह, हम उम्मीद करते हैं कि यह यूनिट पूरे क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र में चौकसी बनाए रखने के लिए मददगार होगी। हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अंडमान में पूर्व में आईएनएस बाज और अब पश्चिम में आईएनएस जटायु आंख और कान के रूप में काम करेंगे।
समद्री लुटेरों की अब खैर नहीं
समद्री लुटेरों पर लगाम लगाने के साथ ही इस नौसैनिक अड्डे से मालदीव और चीन की हरकतों पर नजर रखी जा सकेगी। मिनिकॉय में एक एयरस्ट्रिप की मंजूरी अंतिम चरण में है और कवारत्ती में 24 घंटे ऑपरेशन वाला हेलिकॉप्टर हैंगर जल्द ही शुरू हो जाएगा। भारतीय वायु सेना के लिए लक्षद्वीप में रडार बेस स्थापित करने के लिए भूमि आवंटित की गई है। मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है, जो संचार की महत्वपूर्ण समुद्री लाइन तक फैला हुआ है। कवारत्ती में आईएनएस द्वीपरक्षक के बाद आईएनएस जटायु लक्षद्वीप में दूसरा नौसैन्य अड्डा है।



