उद्घाटन समारोह: सम्मेलन का उद्घाटन कार्डिनल मिगुएल एंजेल अयुसो क्विसोटा ने किया। गुरु की प्रार्थना: श्री नारायण गुरु द्वारा रचित दैव दसक प्रार्थना का इतालवी संस्करण गाया गया। स्नेह संगम: पहले दिन स्नेह संगम आयोजित हुआ, जो धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है। पोप फ्रांसिस का संदेश: पोप फ्रांसिस आज अपने आशीर्वचन संदेश के साथ समर्थन देंगे। प्रतिनिधि: 15 देशों के 100 से अधिक धार्मिक नेता और प्रमुख व्यक्ति इसमें शामिल हो रहे हैं। शिवगिरी मठ का प्रतिनिधित्व: मठ के महासचिव स्वामी सचिदानंद सहित कई प्रमुख संत इसमें भाग ले रहे हैं। पुस्तक विमोचन: सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। अंतरधार्मिक सहभागिता: हिंदू, ईसाई, इस्लाम, बौद्ध, सिख और यहूदी धर्म के प्रतिनिधि शामिल हुए। वैश्विक सहभागिता: इटली, बहरीन, इंडोनेशिया, आयरलैंड और अमेरिका के प्रतिनिधि भी उपस्थित हैं। मुख्य वक्ता: पनक्कड़ सादिक अली शिहाब थंगल और कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर जैसे प्रमुख वक्ता भी भाग लेंगे। श्री नारायण गुरु का योगदान: यह सम्मेलन अलुवा में गुरु द्वारा आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन की याद में आयोजित किया गया। वैश्विक धार्मिक सद्भाव: सम्मेलन का उद्देश्य अंतरधार्मिक संवाद और एकता को बढ़ावा देना है। प्रार्थना और विचार: प्रतिभागियों ने शांति और सद्भाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन की अवधि: यह आयोजन 1 दिसंबर तक चलेगा। इटली के प्रतिनिधि: अतिरिक्त इतालवी प्रतिनिधि 1 दिसंबर को जुड़ेंगे। गुरु के संदेश का प्रचार: गुरुवुं लोकसमाधानम पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण जारी हुआ। सर्वधर्म विचार: सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के विचारों को साझा किया गया। धर्मगुरुओं की भागीदारी: दुनिया भर से आए धर्मगुरुओं ने इसे समर्थन दिया। धार्मिक सहिष्णुता: यह सम्मेलन धार्मिक सहिष्णुता का अनूठा उदाहरण बना। सम्मेलन का उद्देश्य: विश्व में शांति और मानवता के लिए साझा प्रयास करना।