रांची में मौसम का असर समाज के हर हिस्से पर दिख रहा है, पर सबसे ज्यादा चोट बच्चों को लगी है। जब पूरा शहर घरों में हीटर और कंबल के सहारे बैठा है, तब बच्चे सड़क पर हवा से लड़ रहे हैं। सुबह के अंधेरे में बसों का इंतजार करना उनके लिए कठिन हो गया है।
परिवारों का कहना है कि प्रशासन हर साल की तरह इस साल भी देरी कर रहा है। ठंड का कैलेंडर तय है, लेकिन तैयारी कभी समय पर नहीं होती। बच्चों की सेहत बिगड़ रही है और स्कूल की उपस्थिति नीति तनाव बढ़ा रही है।
प्रिंसिपलों ने भी माना है कि छोटे बच्चों की परेशानी साफ नजर आती है। लेकिन वे आदेश आने से पहले कुछ नहीं कर पा रहे। लोगों का सवाल है कि संवेदनशील फैसला आखिर कब लिया जाएगा।



