बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जुड़ा मामला अब गंभीर कानूनी रूप ले चुका है। कैदियों के वीडियो वायरल होने पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट प्रशासन के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा। मामले को सुरक्षा से जोड़कर देखा गया।
अदालत ने कहा कि सिर्फ वार्डर या सहायक जेलर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जेल अधीक्षक और आईजी की भूमिका पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने सरकार के हलफनामे को अधूरा बताया। जवाब में स्पष्टता की कमी बताई गई। सख्त लहजे में टिप्पणी की गई।
हाईकोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। जैमर की स्थिति और सीसीटीवी जांच रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने पूछा कि सुविधा देने वाले लोगों की पहचान हुई या नहीं। भविष्य की रोकथाम योजना भी मांगी गई। लापरवाही पर स्वतंत्र जांच के संकेत दिए गए।


