सारंडा वन क्षेत्र को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था। तीन महीने की समय सीमा तय की गई थी। इसके बावजूद आदेश लागू नहीं हुआ। विधानसभा में यह मुद्दा उठा। सरकार ने रिव्यू पिटिशन की जानकारी दी। लेकिन याचिका की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इससे जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए। विधायक ने सरकार से सीधा जवाब मांगा। सदन में बहस हुई।
पर्यावरण विभाग ने माना कि अंतिम तिथि निकल चुकी है। 12 फरवरी 2026 तक अधिसूचना जारी होनी थी। आदेश में क्षेत्र का स्पष्ट विवरण था। कुल 31468.25 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल था। छह कम्पार्टमेंट बाहर रखे गए थे। इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। सरकार ने इसे कानूनी कारण बताया। लेकिन देरी का ठोस कारण नहीं दिया। इससे पारदर्शिता पर सवाल बने हुए हैं। जनता जवाब चाहती है।
सारंडा पहले से संरक्षित क्षेत्र रहा है। वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से यह अहम है। आदेश लागू न होने से चिंता बढ़ी है। सरकार की मंशा पर चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम अहम होगा। जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। पर्यावरणीय हित जुड़े हैं। खनन और संरक्षण का टकराव बना हुआ है। निर्णय में देरी आलोचना का कारण बन रही है। यह मामला शासन की परीक्षा है।


