झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासनिक जवाबदेही पर स्पष्ट रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि नियम मौजूद हैं, अब बहाने स्वीकार नहीं होंगे। बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन पूरी तरह प्रशासन की जिम्मेदारी है। वर्षों की लापरवाही पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। अब ठोस कार्रवाई का समय है।
कोर्ट ने सरकार को 30 दिनों की समयसीमा दी है। सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल ऑफिसर बनाया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिला-वार सूची तैयार करनी होगी। सभी अस्पतालों को वैध अनुमति लेनी होगी। डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होगी। यह व्यवस्था पारदर्शिता लाएगी।
न्यायालय ने कहा कि नियम उल्लंघन पर कड़ी सजा दी जाएगी। जुर्माना और अभियोजन दोनों का प्रावधान है। अस्पतालों में अलग कमेटी बनेगी। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा होगी। कोर्ट ने भरोसा जताया कि व्यवस्था अब सुधरेगी। नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा प्राथमिकता होगी।


