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वर्चस्व संघर्ष मामले में सुनवाई के बाद राहत मिली.

रांची : झारखंड हाईकोर्ट में चर्चित आपराधिक मामले की सुनवाई हुई।

पांडेय गिरोह से जुड़े अपराधी विकास तिवारी की जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। फैसले के बाद कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। यह मामला कोयलांचल क्षेत्र में आपराधिक वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। मामले ने पहले भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर की। फैसले के बाद मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन भी घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था।

जानकारी के अनुसार चैनपुर थाना क्षेत्र में हुई हिंसक घटना में भरत पांडेय और दीपक साव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना में अंशु सिंह और बब्लू सिंह घायल हुए थे। दोनों का संबंध पांडेय गिरोह से बताया गया था। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई नाम सामने आए थे। हत्या की इस घटना को वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर देखा गया। कोयलांचल क्षेत्र में इस मामले की काफी चर्चा रही। कई लोगों से पूछताछ भी की गई थी। पुलिस ने विभिन्न पहलुओं पर जांच की। मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

भरत पांडेय के पिता प्रदीप पांडेय ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में विकास तिवारी सहित 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। यह प्राथमिकी छह जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। बताया जाता है कि विकास तिवारी के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इनमें से कई मामलों में वह बरी भी हो चुके हैं। कुछ मामलों में वह पहले से जमानत पर हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है। कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। संबंधित पक्षों की नजर अब आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। इस फैसले को मामले का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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