रांची से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने प्रफुल्ल मालाकार को मिली जमानत को सही ठहराया है। झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई। यह सुनवाई न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ में हुई। एनआईए ने जमानत का विरोध किया था। लेकिन कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लिया। इससे हाईकोर्ट का आदेश कायम रहा। इस फैसले को अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संतुलित निर्णय बताया है। मामले ने पहले भी काफी चर्चा बटोरी थी।
प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आरोपी लंबे समय से जेल में है। उसे 15 साल की सजा सुनाई गई थी। यह सजा 2024 में विशेष अदालत ने दी थी। आरोपी लगभग साढ़े चार साल तक हिरासत में रहा है। इस आधार पर जमानत को उचित बताया गया। कोर्ट ने इन तथ्यों पर विचार किया। इसके बाद एनआईए की याचिका खारिज कर दी गई। इससे आरोपी को राहत मिली है।
मामला 2012 में हुई गिरफ्तारी से जुड़ा है। प्रफुल्ल मालाकार को दानापुर से पकड़ा गया था। आरोप है कि उसे समय पर कोर्ट में पेश नहीं किया गया। परिवार ने इस पर शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया। पुलिस ने दावा किया कि उसके पास हथियार था। इस मामले का ट्रायल एनआईए कोर्ट में चला। कोर्ट ने उसे दोषी ठहराया था। बाद में हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा है।



