रांची : झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती-2015 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों को राहत दी है। कोर्ट ने पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज और प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने का आदेश दिया है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति की कार्यवाही करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की है। यह मामला वर्ष 2015 की सिपाही भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस संबंध में छह अलग-अलग विशेष अनुमति याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं पर अदालत ने एक साथ सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं में जितेंद्र कुमार शर्मा व अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं। अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति का रास्ता खोलने की मांग की थी। उनका कहना था कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी जरूरी चरण पूरे किए थे। इसके बावजूद दूसरी मेरिट सूची जारी नहीं की गई।
जेएसएससी ने वर्ष 2015 में विज्ञापन संख्या 04/2015 जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत झारखंड पुलिस में 7,272 सिपाही पदों पर नियुक्ति की जानी थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2,380 पद रिक्त रह गए थे। इनमें 1,168 पद महिला अभ्यर्थियों के लिए थे। वहीं 1,212 पद अन्य श्रेणी के थे। अभ्यर्थियों के अनुसार उन्होंने चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हिस्सा लिया था। उनका दस्तावेज सत्यापन भी पूरा हो चुका था। इसके बावजूद रिक्त पदों के लिए दूसरी मेरिट सूची जारी नहीं की गई। दूसरी सूची नहीं आने से कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी। इसके बाद अभ्यर्थियों ने न्यायिक रास्ता अपनाया। छह अलग-अलग एसएलपी के माध्यम से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब पात्र अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की संभावना बनी है। राज्य सरकार को दस्तावेज और प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा करना होगा। सत्यापन के बाद चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति की कार्यवाही करनी होगी। अदालत के आदेश के बाद लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिली है। रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया अब आगे बढ़ सकती है। हालांकि नियुक्ति से पहले सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। संबंधित विभाग को अदालत के निर्देश के अनुसार समय सीमा में कार्रवाई करनी होगी। अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा। राजीव नंदा और शोएब आलम ने भी अदालत में दलीलें रखीं। सद्दाम फिरदौस और एओआर एफआइ चौधरी ने भी अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार की कार्रवाई पर नजर रहेगी।



