झारखंड में आयोजित माध्यमिक आचार्य परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जेएसएससी द्वारा समय पर प्रवेश पत्र जारी नहीं किए गए। इससे हजारों अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। अभ्यर्थियों ने इसे प्रशासनिक चूक बताया है। कई छात्रों का कहना है कि महीनों की तैयारी व्यर्थ चली गई। परीक्षा में न बैठ पाने से भविष्य पर असर पड़ा है। इससे अभ्यर्थियों में रोष है। उन्होंने सामूहिक रूप से न्यायालय का रुख किया। मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आयोग की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
याचिका में नई ई-मेल आधारित व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया गया है। यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई थी। अभ्यर्थियों को किसी तरह की सूचना नहीं दी गई। तकनीकी खामियों के कारण प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो सके। कई मामलों में परीक्षा खत्म होने के बाद एडमिट कार्ड जारी हुए। इसे गंभीर लापरवाही माना गया है। आयोग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। इससे छात्रों को भारी नुकसान हुआ। याचिका में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है।
अभ्यर्थियों ने कोर्ट से पुनः परीक्षा कराने की मांग की है। पेपर-2 में बैठने का अवसर देने की अपील की गई है। उन्होंने परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही है। यह मामला भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा है। कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद है। आयोग पर सुधार का दबाव बढ़ा है। भविष्य में ऐसी चूक न हो इसकी मांग की जा रही है। शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखना जरूरी बताया गया है।


